बलरामपुर गार्डन में 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले का पांचवां दिन रहा साहित्यिक गतिविधियों से गुलजार, दलित-बौद्ध साहित्य से लेकर अवधी संस्कृति तक पर हुई चर्चा
लखनऊ, 5 अक्टूबर। बलरामपुर गार्डन में चल रहे 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले का पांचवां दिन किताबों की खरीदारी के साथ साहित्यिक विमर्श, पुस्तक विमोचन, कहानी पाठ और काव्य समारोहों से जीवंत रहा। मेले में दलित और बौद्ध साहित्य की पुस्तकों ने खास आकर्षण बनाया तो विभिन्न मंचों पर साहित्य, समाज, लोकतंत्र और अवधी संस्कृति से जुड़े विषयों पर संवाद हुआ।
दलित साहित्य को सदियों के शोषण, संघर्ष, पीड़ा और आत्मसम्मान की आवाज के रूप में रेखांकित करते हुए मेले में इस धारा से जुड़ी कई किताबें पाठकों का ध्यान खींच रही हैं। सम्यक प्रकाशन के स्टॉल पर आरएल चन्द्रापुरी की भारत में ब्राह्मणराज और पिछड़ा वर्ग आंदोलन, राजकुमार इतिहासकार की नागवंशी भारत और डा. राजेंद्र प्रसाद सिंह व डा. शशिकला की नये औजार से कबीर की खुदाई को पाठकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। वर्ष 1929 में प्रकाशित सुंदरलाल सगर की यादव (जाटव) जीवन के दोनों भाग भी नए संस्करण में उपलब्ध हैं।
अम्बेडकर और लोकतंत्र से जुड़ी किताबें चर्चा में
सेतु प्रकाशन पर अशोक गोपाल की पुरस्कृत अनूदित पुस्तक बाबासाहेब डा. अम्बेडकर : जीवन और विचार पाठकों की पसंद बनी हुई है। वहीं राजपाल के स्टॉल पर रतनलाल द्वारा संपादित आम्बेडकर और संसदीय लोकतंत्र चर्चा में है। संविधान प्रचार के स्टॉल पर संविधान की विभिन्न आकारों की प्रतियों के साथ डा. देवेन्द्र प्रताप यादव की जहरीला बहुमत लोकतंत्र से जुड़े मौजूदा सवालों को सामने रखती है। रामकुमार गौतम के संपादन में प्रकाशित बहुजन पर प्रदर्शक में 26 विभूतियों पर केंद्रित सामग्री है। बौद्ध साहित्य में डा. जगन्नाथ उपाध्याय की भारत को बुद्ध धर्म की देन भी पाठकों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
दूसरी ओर प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर लेखक महेन्द्र कुमार अग्रवाल अपनी पुस्तक मेरा संभल महान के माध्यम से पाठकों को संभल के इतिहास, कल्कि धाम, हरिहर मंदिर, सनातन परम्पराओं और सती स्मारकों से परिचित कराते नजर आए।
मंचों पर कविता, कहानी और पुस्तक विमोचन
मुख्य मंच पर सर्वेश अस्थाना की परिकल्पना में उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के ‘प्रणाम परिवार सम्मान’ कार्यक्रम में साहित्यकारों की स्मृति में उनके परिवारीजनों ने नरेंद्र गरल बदायूं, बलराम श्रीवास्तव मैनपुरी, अर्जुन सिंह चांद, डा. राजीव राज इटावा और गजेन्द्र प्रियांशु बाराबंकी को सम्मानित किया। इसके बाद मुकुल महान के संचालन में काव्य समारोह हुआ।
सुबह नवसृजन के कार्यक्रम में निबंध संग्रह सद्चित्त आनन्द और काव्य संग्रह क से कवि का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में डा. मिथिलेश दीक्षित, प्रो. ओमप्रकाश पाण्डेय, ओम नीरव और नरेन्द्र भूषण समेत कई साहित्यकार मौजूद रहे। अखिल भारतीय अगीत परिषद के काव्य समारोह में विभिन्न रसों की रचनाओं ने माहौल को साहित्यिक रंग दिया।
अवधी साहित्य पर आयोजित संवाद में पद्मश्री विद्याविंदु सिंह, डा. रामबहादुर मिसिर, डा. करुणा पाण्डेय, विजय भास्कर पाण्डेय और डा. हरिशंकर मिश्र ने विचार साझा किए।
दूसरे मंच पर साहित्य और समाज पर बहस
द्वितीय मंच पर लेखक संजीव जायसवाल ने कथा रचना पाठ किया। इसके बाद ओपन माइक में किताबों पर बातचीत हुई। शाम को जन संस्कृति मंच की ओर से कौशल किशोर की पुस्तक समय, साहित्य और समाज का विमोचन साहित्यकार शकील सिद्दीकी की अध्यक्षता में हुआ। पुस्तक पर शकील सिद्दीकी, दिनेश प्रियमन, डा. उषा राय, शैलेश पंडित और कुमार विनीताभ ने विचार रखे। संचालन शांतम निधि ने किया, जबकि आभार फरजाना महदी ने व्यक्त किया।
10 प्रतिशत से अधिक छूट, प्रवेश नि:शुल्क
फोर्स वन द्वारा आयोजित पुस्तक मेला रोज सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक जारी है। मेले में प्रवेश नि:शुल्क है और खरीदी गई प्रत्येक पुस्तक पर कम से कम 10 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। मेले के सहयोगी संस्थानों में यूपी मेट्रो, रेडियोसिटी, ओरिजिंस, किरण फाउंडेशन, ज्वाइन हैंड्स फाउंडेशन, लोकआंगन, विश्वम् फाउंडेशन, विजय स्टूडियो, गोल्डेन ग्रास तथा कविता-किस्से-कहानियां शामिल हैं।






