पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम की याद में संगोष्ठी आयोजित, वक्ताओं ने दिए सादगी और संघर्ष के संदेश; मदरसा छात्राओं को मिला पुरस्कार
लखनऊ (अमीनाबाद): बज़्म-ए-ख़वातीन के तत्वावधान में आज ज़नाना पार्क में भारत के पूर्व राष्ट्रपति व ‘मिसाइल मैन’ डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की स्मृति में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजधानी की प्रमुख सामाजिक एवं साहित्यिक हस्तियों ने भाग लेकर डॉ. कलाम के आदर्शों पर विचार व्यक्त किए।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए अनवर जहाँ ने कहा कि गरीबी में बचपन बिताकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचने वाले डॉ. कलाम साबित करते हैं कि पहचान हालात से नहीं, हौसले से बनती है। डॉ. सुधा मिश्रा ने अंतरिक्ष व मिसाइल तकनीक में उनके योगदान को याद किया, तो डॉ. ज़ीनत वाहिद ने उनके बच्चों के प्रति प्रेम व ‘पीपुल्स प्रेसिडेंट’ वाले रूप को रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि डॉ. शाहिदा सिद्दीकी सहर ने युवाओं को राष्ट्र की असली पूँजी बताते हुए डॉ. कलाम के प्रसिद्ध कथन—”सपने वे नहीं जो सोते समय देखें, बल्कि वे हैं जो सोने न दें” – का स्मरण कराया। वहीं बज़्म-ए-ख़वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज़ सिदरत ने कहा कि डॉ. कलाम को सच्ची श्रद्धांजलि उनके बताए रास्ते पर चलकर देश व इंसानियत की सेवा करना है।
छात्राओं ने दिखाया हुनर:
इस अवसर पर बज़्म-ए-ख़वातीन द्वारा संचालित मदरसा ‘हयातुल उलूम निज़ामिया’ में भाषण, क्राफ्ट, फोटोशॉप और सिलाई-कढ़ाई प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं—मसाबा हयातुल्लाह, सकीना, और रुबीना को मुख्य अतिथि किरण कलंत्री द्वारा पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन नश्त हयातुल्लाह ने किया, जिसमें अरशिया बानो, ज़ैनब सिद्दीकी और हफ़्सा फ़ातिमा सहित अनेक गणमान्य महिलाएँ उपस्थित रहीं।







