- नगर निगम चुनाव आचार संहिता बाद वर्ष 2017-18 हेतु जारी होने वाली बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव पर उपभोक्ता परिषद ने शुरू की लामबंदी।
- उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री महोदय से विद्युत अधिनियम 2003 की धारा-108 के तहत ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में प्रस्तावित लगभग 350 प्रतिशत व किसानों की 80 प्रतिशत वृद्धि को नाम मात्र वृद्धि में परिवर्तित करने की उठायी मांग।
- उपभोक्ता परिषद का बड़ा सवाल उदय अनुबन्ध में औसत वृद्धि 6.95 प्रतिशत थी अनुमानित उसके विपरीत पावर कार्पोरेशन ने क्यों दिया औसत वृद्धि 22.66 प्रतिशत का प्रस्ताव?
- उपभोक्ता परिषद ने मा. मुख्यमंत्री से उठायी मांग आम जनता को राहत दिलाने के लिये सरकार समय रहते उठाये कदम।
लखनऊ 19 नवंबर। मल्टी ईयर टैरिफ प्रस्ताव के तहत वर्ष 2017-18 का जहां नई बिजली दर की घोषणा नगर निगम चुनाव आचार संहिता के बाद कभी भी हो सकती है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता परिषद ने पुनः उप्र सरकार से यह मांग उठायी है कि पावर कार्पोरेशन द्वारा दाखिल बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव जिस पर विगत दिनों सुनवाई पूरी हो गयी है और आयोग में विचाराधीन है। जिसमें ग्रामीण घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 350 प्रतिशत वृद्धि किसानों की 80 प्रतिशत व शहरी घरेलू उपभोक्ताओं की 15 प्रतिशत वृद्धि को वापस लिया जाये। उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ योगी से यह मांग की है कि उप्र सरकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा-108 के तहत लोक महत्व का विषय मानते हुए नियामक आयोग को यह निर्देश दें कि व्यापक बिजली दर बढ़़ोत्तरी को नाम मात्र बढ़ोत्तरी में परिवर्तित किया जाये। वह इसलिये भी जरूरी है कि विगत दिनों उदय स्कीम में 2017-18 के लिये मात्र 6.95 प्रतिशत औसत वृद्धि प्रस्तावित थी, लेकिन पावर कार्पोरेशन द्वारा मनमाने तरीके से 22.66 प्रतिशत औसत वृद्धि प्रस्तावित की गयी है। जो उदय अनुबन्ध का खुला उल्लंघन है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विगत वर्ष उप्र सरकार, भारत सरकार व पावर कारपोरेशन के बीच उदय स्कीम के तहत त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। जिसमें बिजली कम्पनियों की सेहत में सुधार हेतु अनेकों वित्तीय मानक तय किये गये थे। जिसमें आगामी वर्षों में बिजली दर वृद्धि भी अनुमानित थी। परन्तु बडे दुर्भाग्य के साथ कहना पड रहा है कि अब पावर कारपोरेशन इस त्रिपक्षीय समझौते से पीछे हटते हुए उपभोक्ताओं को बडा धोखा देते हुए उप्र सरकार की छवि धुमिल करायी जा रही है और उसी आधार पर बिजली दरों में कई गुना बढोत्तरी आयोग को सौंपा गया है, जो पूरी तरह असंवैधानिक है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इस त्रिपक्षीय उदय के समझौते के तहत वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 तक बिजली दरों में बढोत्तरी व एटीसी हानियों को अनुमानित कर उस पर लाने का लक्ष्य रखा गया था जो निम्नवत हैः-
वित्तीय वर्ष एटीसी हानियाॅं प्रस्तावित विद्युत वृद्धि
2017-18 23.63 प्रतिशत 6.95 प्रतिशत
2018-19 19.36 प्रतिशत 6.80 प्रतिशत
2019-20 14.86 प्रतिशत 6.60 प्रतिशत
उदय स्कीम के तहत अलग-अलग वर्षों में जो बिजली दर बढोत्तरी प्रस्तावित थी, से अलग पावर कार्पोरेशन द्वारा उप्र विद्युत नियामक आयोग में वर्ष 2017-18 उदय स्कीम में प्रस्तावित 6.95 प्रतिशत वृद्धि से विपरीत 22.66 प्रतिशत की औसत वृद्धि प्रस्तावित की गयी है। जिससे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में आने वाले समय में बड़ी वृद्धि हो सकती है, जिसको रोकने के लिये उप्र सरकार को अभी से कदम उठाना जरूरी है।







