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    Home»ब्लॉग

    तोंद के साथ भी जीना सीखिये

    By November 27, 2017 ब्लॉग No Comments5 Mins Read
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    पेट के तोंद मे बदलने का अंदेशा सबसे पहले तोंद के मालिक को ही होता है पर असमंजस बना रहता है पहले कुछ महिनो तक, वो उसे पेट ही कहता रहता है, उसके अस्तित्व से ही इनकार करता है।
    हल्के से लेता है वो अपनी तोंद को, समझाता है वो खुद को कि ये लगातार हो रहे शादी ब्याहो मे उडाये गये तर माल का नतीजा भर है ! उसे लगता है पिछले कुछ दिनो से पूरी ना हो सकी नींद की वजह से हुआ है ऐसा और जल्दी ही वह अपने पुराने शेप मे लौट आयेगा।
    नयी नयी तोंद के मालिक को लगता है कि ये मौसमी वायरल टाईप की, भरी जवानी मे हुये मुँहासो जैसी ही कोई चीज है, जिसे बिना इलाज के एकाध हफ्ते मे खुदबखुद ठीक हो ही जाना है।
    पर ऐसा होता नही ! हफ्ते महिनो मे बदलते है वो वो नामुराद चीज उसके सीने से नीचे और कमर के ऊपर बेशरमी से अपना आयतन बढाती रहती है।
    बीबी बच्चे टोकने लगते हैं ऐसे में, वो बीबी के माथे मढता है अपनी तोंद। उसके बनाये खाने को ,उसके जिद करके खरीदे गये टीवी को, रोज रोज आते त्यौहारो को ,अपने बाप, दादाओ की तोदों सी आनुवांशिकता को इसका जिम्मेदार बताता है। तोंद का जिक्र होते ही मुँह बनाता है। लडने भिडने पर ऊतारू होता है और घर का माहौल खराब कर देता है। चाहता ही नही कोई यह नाजुक मुद्दा छेडे,  बीबी बच्चे जल्दी ही समझदार हो जाते है ऐसे मे और तोंद अनदेखी की जाने लगती है।
    पर तोंद को पसंद आता नही अनदेखा किया जाना। वह शर्ट के बटन तोड कर प्रगट हो जाना चाहती है। हो ही जाती है ! मजबूर कर देती है बंदे को कि शर्ट इन करना छोड दे। बहुत बार शर्ट हाथ खडे कर देती है तब कुरता इज्जत बचाने की जिम्मेदारी उठाने आगे आता है।
    बीबी बच्चे मन मार कर भले ही तोंद की तरफ से आँखे फेर लें पर कमीने दोस्त यार मानते नही ! मजे लिये जाते है तोंद के मालिक के, तोंद के फायदे समझाने के साथ साथ उसे तोंद के निकल आने के ऐसे ऐसे कारण बताते है जो केवल खून जलाते हैं ! तोंद से पीछा छुडाने के ऐसे ऐसे जानलेवा तरीके भी बताना भी दोस्त अपना फर्ज समझते है जिन्हे अमल मे लाने के चक्कर मे बंदे की जान जाते जाते बचती है।
    बहुत बार तानो से प्रेरित भी होता है वो। लडता है वो अपनी तोंद से। कसम उठाता है कि वो वापस अपनी तेईस साल की उम्र वाला पेट हासिल करके ही दम लेगा। अपने लिये कठिन टाईम टेबल तय कर लेता है वो। नये मँहगे स्पोर्ट्स शू खरीदता है। सुबह जल्दी उठकर घूमने जाना शुरू होता है। क्या खाना है। कितनी पीना है जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओ को भी इस टाईम टेबल मे जगह दी जाती है। नजदीकी जिम की साल भर की फीस एडवान्स मे भर दी जाती है। कपालभाति और अनुलोम विलोम भी जिंदगी मे चले आते हैं। आयुर्वेद के मरियल से डॉक्टरो की सलाहो पर अमल भी होता है। यह सिलसिला चलता भी है कुछ दिन, फिर कभी अचानक लेट नाईट पार्टी हो जाती है ! मौसम अचानक खराब हो जाता है। सुबह सुबह बॉस को लेने एयरपोर्ट भी जाना पडता है बंदे को ! कभी कभी पीठ की कोई नस खिंच जाती है। नतीजा वही निकलता है इसका। स्पोट्स शू पर धूल जमने लगती है और तोंद चीन की तरह चुपचाप अपना इलाका बढाने मे लगी रहती है।
    तोंद और आदमी की लडाई मे तोंद हमेशा बाजीराव पेशवा साबित होती है। आपको हथियार डालने ही पडते है इस अजेय योद्धा के सामने। घुटने टेकता है वो अपनी तोंद के सामने और संधि करने पर विवश होता है।
    ऐसे में अब क्या करे आदमी, वो अनचाहे गर्भवती हो गयी महिला की तरह बर्ताव करता है ढीले कपडे पहनना शुरू करता है अब वो, कुछ समय पहले ही खरीदी गई पेंट के बगावती हुको को नजरअंदाज कर अगली साईज का पेंट खरीदता है। फोटो शूट करते वक्त साँस बाहर छोडता है और तब तक साँस नही लेता जब तक फोटोग्राफर क्लिक ना कर दे। अपनी फोटो तब तक एडिट करता है जब तक उसमे से तोंद अन्तर्ध्यान ना हो जाये।
    तोंद से पराजित आदमी सोफे मे धँसे रहना स्वीकार कर लेता है, अब टीवी पर बाबा रामदेव का पेट फुलाना, पिचकाना प्रभावित नही करता उसे, वो एक लार्ज पीत्जा ऑर्डर करता है और चैनल बदल देता है। मान लेता है कि वो अब अपने घुटने कभी नही देख पायेगा।
    स्मार्ट लोगो की संगत से बचता है अब वो, अपने जैसे तोंद के मालिक पंसद आने लगते हैं उसे, उसके तर्क अपनी तोंद को सपोर्ट करते हैं अब। मामूली बात है ये यार, क्या फर्क पडता है। किसकी नही होती तोंद। खाये पिये लोगो की निशानी है ये भाई, एक उम्र के बाद तो सबकी निकल आती है ये हमारी भी है तो है।
    तोंद का निकलना ,निकले रहना जन्म मरण सा ही विधि हाथ है। यदि ये आपका नक्शा बिगाड कर पाकिस्तान की तरह पैदा हो ही चुकी है तो मान लीजिये कि वह है। इससे लड़ना समय और धन की बरबादी ही है और कुछ नही।
    जीना सीखिये अपनी तोंद के साथ इसी में जीवन का सार है।

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