चलो मिलकर इस तरह मुल्क की सियासत चलाते हैं,
तुम हिंदुओं को डराओ, हम मुस्लमानों को डराते हैं।
तुम छेड़ो तान चौरासी की, हम गोदरा याद दिलाते हैं,
तुम बहाओ बाबरी पे आंसू, हम मंदिर के गीत गाते हैं।
चलो मिलकर इस तरह मुल्क की सियासत चलाते हैं।।
तुम छोड़ो बोफोर्स के गोले, हम राफेल उड़ाते हैं,
तुम बहाओ बाटला पे आंसू, हम संजरपुर को गरियाते हैं।
तुम जीजा के राज खोलो, हम बेटे की कमाई बताते हैं,
तुम बहाओ कश्मीर पे आंसू, हम पाक को आंखे दिखाते हैं।
चलो मिलकर इस तरह मुल्क की सियासत चलाते हैं।।
तुम फैला दो आग मजहब की, हम आग का ईंधन जुटाते हैं,
तुम बहाओ कत्लेआम पे आंसू, अपनी कौम को हम समझाते हैं।
तुम जीतो या हम हारें, मिलकर अवाम को उल्लू बनाते हैं,
तुम कहो विकास को पागल, हम विकास का यशगान गाते हैं।
चलो मिलकर इस तरह मुल्क की सियासत चलाते हैं।।
आशीष वशिष्ठ








3 Comments
Behtreen…
बहुत सुन्दर।
Having read this I believed it was rather informative.
I appreciate you taking the time and energy to put this information together.
I once again find myself spending a lot of time
both reading and commenting. But so what, it was still worthwhile!