Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, July 25
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग

    फेसबुक के अनुभव!

    By December 10, 2017 ब्लॉग No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 550

    अंशुमाली रस्तोगी

    फेसबुक पर रहने के अपने फायदे-नुकसान हैं। पर, फेसबुक पर न रहने के भी अपने फायदे-नुकसान हैं। तकरीबन दो साल फेसबुक से दूरी बनाकर यह मैंने करीब से महसूस किया है। बताता हूं…।

    दो साल में मैंने फेसबुक पर अपने दो खाते बनाए और बाद में उन्हें थोड़े-थोड़े अंतराल में हमेशा के लिए हटा दिया। फिर एक छोटा-सा गैप लिया। उसके बाद एक और नया खाता बनाया। तीसरी दफा जब मैं फेसबुक पर लौटा। तो देखता हूं यहां का तो पूरा परिदृश्य ही बदल चुका है। फेसबुक में जो अंदरूनी बदलाव हुए सो हुए ही। साथ में सिक्योरिटी मेजर्स भी इतने तगड़े हो गए कि कुछ पूछिए मत।

    फिर किया मैंने ये कि अपने पिछले दोनों खातों में जो भी दोस्त-साथी थे उन्हें दोबारा जोड़ना शुरू किया। एक-एक कर सबको फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजीं। पुराने कुछ साथियों ने तो रिक्वेस्ट पुनः स्वीकार कर भी ली। उनका दिल से शुक्रिया। पर साथ में यह प्रश्न जरूर दागा गया- ‘यार, हमें अमित्र (अन-फ्रेंड) क्यों कर दिया था?’ ये प्रश्न स्वभाविक ही था। इसका सहज उत्तर भी मैंने उन्हें दिया। कुछ पुराने साथी तो इतने व्यस्त हो लिए कि उन्होंने मेरी रिक्वेस्ट स्वीकार करना तो दूर साथ में जो संदेश इन-बॉक्स क्या था, वो नहीं पढ़ा। उनकी अति-व्यस्तताएं उन्हें मुबारक।

    उनमें से ज्यादातर ने तो यही सोचा होगा कि हमें अन-फ्रेंड करने के बाद महाराज फिर से रिक्वेस्ट भेज रहे हैं, लिस्ट में पुनः जुड़ने की। भला हम क्यों जोड़ें? पड़ी रहने दो ऐसे ही पेंडिंग। कोई नहीं। मैंने बुरा भी माना। हर व्यक्ति की अपनी मर्जी है, रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट करने या न करने की। कोई जोर थोड़े है।

    फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने के दौरन एक अनुभव यह भी हाथ आया कि बहुत से लोगों ने अपने फेसबुक की सिक्योरिटी को इतना मजबूत किया हुआ है कि किसी के द्वारा उन्हें रिक्वेस्ट भेजने से पहले फेसबुक आपसे पूछता कि ‘आप व्यक्तिगत रूप से उक्त सज्जन को जानते हैं या नहीं?’ कन्फर्म करने के बाद भी रिक्वेस्ट नहीं जा पाती। तब आपके पास उस सज्जन को ‘फॉलो’ करने के अतिरिक्त कोई और विकल्प नहीं होता।

    जैसे बिना परमिशन के आईसीयू वार्ड में घुसने की मनाही होती है ठीक ऐसे ही हम लोगों ने अपने फेसबुक एकाउंट को बना लिया है। यहां हर किसी की अपनी अलग दुनिया है। अपने संगी-साथी और संबंधी हैं। अपनी-अपनी डिजिटल विचारधाराएं हैं। सारे संघर्ष और क्रांतियां भी यहीं हैं।

    मगर यहां असहमति या आलोचना को बर्दाश्त करने की गुंजाइश कतई नहीं है। सामने वाले से अगर आपने अपनी असहमति को जाहिर किया भी, वो या तो आपको ब्लॉक कर देगा या फिर अन-फ्रेंड कर मुक्ति पा लेगा। ये मैं यों ही हवा में नहीं कह रहा। मैंने ऐसा करते तमाम ऊंचे बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों, लेखकों को अक्सर ही देखा है।

    फेसबुक पर रहकर हम अपने आप को ‘असुरक्षित’-सा महसूस करते हैं। बहस में अलोकतांत्रिक से हो जाते हैं। हरदम कोशिश यही रहती है कि हमसे सामान विचारधारा वाले मित्र लोग ही जुड़ें। विपरीत विचारधारा वालों के प्रति मन में एक ‘घृणा’ जैसा माहौल रखते हैं।

    सबसे बड़ी समस्या फेसबुक से जुड़े लोगों की यह है कि यहां हर कोई खुद को ‘विद्वान’ समझता है। उस विद्वान से आप न तर्क कर सकते हैं न बहस। विद्वान से पहले उसके चेले ही आपकी इज्जत की ऐसी-तैसी कर डालेंगे। मसला अगर धर्म या जाति से जुड़ा हो तो क्या कहने! इस प्रकार के मसलों का आज सबसे बड़ा अखाड़ा सोशल मीडिया बना हुआ है। हर कोई ऐसे मुद्दों पर लड़ने-भिड़ने को तैयार बैठा है। आप खुद बच सकते हैं तो बचें।

    ऐसा भी नहीं है कि फेसबुक पर कुछ सार्थक नहीं हो रहा। गंभीर-पढ़ा या लिखा नहीं जा रहा। ये सब भी हो रहा है पर हमें दिखाई नहीं देता। दिमाग को हमने इस कदर राजनीति के जालों के बीच उलझाए रखा है कि सार्थक चीजें हमें दिख ही नहीं दे पातीं। वही चौबीस घंटे बेमतलब की राजनीतिक बहसें। और अपने-अपने वैचारिक उल्लू सीधा करने की हसरतें।

    मुझे लगता है, यही कुछ खास राजनीतिक वजहें हैं जिस कारण हमने अपने फेसबुक को सिक्योरिटी का जाल बना डाला है। कि, किसी भी अनजान का यहां प्रवेश करना सख्त मना है।

    महिलाओं का तो समझ में आता है पर पुरुष कब से खुद को असुरक्षित मासूस करने लगे। वे तो इन संसार के राजा हैं। राजा को भला किसका और क्यों डर?

    पहले तो मुझे भी थोड़ा अफसोस रहा था कि क्यों मैंने फेसबुक से अपने दोनों खातों को हमेशा के लिए हटा दिया। मगर उसके बाद यहां के जो अनुभव हासिल हुए तो मुझे लगा कि मैंने ठीक ही किया। सोशल मीडिया के अनुभव भी बहुत जरूरी हैं। आखिर पता तो चले कि डिजिटल होता इंसान अपने व्यवहार और स्वभाव में कैसा होता जा रहा है।

    हम अक्सर कहते हैं न कि देखो दुनिया कितनी तेजी से बदल रही है। फेसबुक के अनुभव पाने के बाद यह बात अब मुझे सौ फीसद सच साबित होती हुई दिख रही है। अभी आगे और कितना बदलेगी यह आगे देख पाएंगे।

    Keep Reading

    “My children are inside; I am standing outside” – This hell of child labor must end now.

    ‘मेरे बच्चे अंदर हैं, मैं बाहर खड़ा हूँ’ – बाल श्रम की इस नरक को अब बंद होना चाहिए

    the-nations-future-on-the-streets-of-delhi

    दिल्ली की सड़कों पर देश का भविष्य!

    क्रूर नियति के बीच हमारी क्रूरता और उम्मीद की कुछ किरणें

    The battle between development and the environment in Uttarakhand.

    उत्तराखंड में विकास बनाम पर्यावरण की जंग

    Give up the insistence on a hunger strike; instead, wage a long-term struggle to change the system.

    सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद अब अदालत में जंग, आदिवासी महिलाओं पर भी लाठी

    अब उच्चतम न्याय की आस में शिक्षा का एक मंदिर

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    “My children are inside; I am standing outside” – This hell of child labor must end now.

    ‘मेरे बच्चे अंदर हैं, मैं बाहर खड़ा हूँ’ – बाल श्रम की इस नरक को अब बंद होना चाहिए

    July 25, 2026
    Krishna Gautam’s classy glamour in a blue blazer; the magic of power dressing takes over the red carpet.

    ब्लू ब्लेज़र में कृष्णा गौतम का क्लासी ग्लैमर, रेड कार्पेट पर छाया पावर ड्रेसिंग का जादू

    July 24, 2026
    Husband unable to bear the shock of wife's death; collapses and dies while applying vermilion.

    पत्नी की मौत का सदमा सहे न सका पति, सिंदूर भरते हुए तोड़ा दम

    July 24, 2026
    TPS Music Ushers in a New Wave of Romance; A String of Tiwari Sarkar's Songs Set for Release

    TPS Music पर रोमांस गीतों की होगी लगातार बारिश

    July 24, 2026
    Don't ignore mouth ulcers; it could save your life: Experts warn about head and neck cancer.

    मुंह का अल्सर न करें नजरअंदाज, जान बच सकती है: हेड एंड नेक कैंसर पर विशेषज्ञ चेतावनी

    July 24, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading