- ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं व किसानों सहित आम जनता की दरों में व्यापक बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव पर उपभोक्ता परिषद द्वा नियामक आयोग में दाखिल लोकमहत्व विषयक पुनर्विचार याचिका पर उप्र विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष ने पावर कार्पोरेशन से बिन्दुवार तलब की रिपार्ट
- नियामक आयोग अध्यक्ष व उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष की बिजली दर बढ़ोत्तरी पर लम्बी वार्ता
- उपभोक्ता परिषद ने कहा उप्र सरकार किसानों ग्रामीणों की है यदि सच्ची हितैसी तो पावर कार्पोरेशन से अविलम्ब दाखिल कराये उपभोक्ता हित में रिपार्ट
लखनऊ 11 दिसम्बर। उप्र पावर कार्पोरेशन के दबाव में उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा अनमीटर्ड ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 67 से 150 प्रतिशत की वृद्धि किसानों की दरों में 50 प्रतिशत वृद्धि व आम घरेलू उपभोक्तओं की दरों में 12 से 15 प्रतिशत वृद्धि के विरोध में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा 1 दिसम्बर, 2017 को बिजली दर बढ़ोत्तरी पर विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 94 (एफ) के तहत एक पुनर्विचार प्रत्यावेदन सम्बन्धी लोकमहत्व विषयक याचिका दाखिल की थी जिस पर आयोग अध्यक्ष ने परीक्षण का आदेश दिया गया था। उस पर आज उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उ0प्र0 विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल से मिलकर लम्बी वार्ता की और उनके सामने यह तथ्य रखा कि चुकि बिजली दर बढ़ोत्तर प्रदेश में लागू हो गयी है इसलिये अविलम्ब उपभोक्ता परिषद के पुनर्विचार प्रत्यावेदन सम्बन्धी लोकमहत्व विषयक याचिका पर अविलम्ब विचार कर उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में निर्णय लिया जाय उपभोक्ता परिषद द्वारा आयोग अध्यक्ष कें सामने पूरे प्रदेश में चल रहे किसानों व ग्रामीण उपभोक्ताओं के आन्दोलन के बारे में भी विस्तृत वार्ता की गयी और उनके सामने यह तथ्य रखा गया कि ग्रामीण व किसानों की दरों में कमी न हुई तो उनको विवश होकर लालटेन युग में जाना पड़ेगा।
उप्र विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री एस0के0 अग्रवाल ने मामले की गम्भीरता को देखते हुये अविलम्ब पावर कार्पोरेशन से रिपार्ट तलब करने का फैसला सुनाया तत्पश्चात उप्र विद्युत नियामक आयोग के निदेशक (टैरिफ), डा. अमित भार्गव ने मुख्य अभियन्ता रेगुलेटरी अफेयरस यूनिट (आरएयू) से विद्युत दर बढ़ोत्तरी के सम्बन्ध में उपभोक्ता परिषद द्वारा दाखिल पुनर्विचार प्रत्यावेदन सम्बन्धी लोकमहत्व विषयक याचिका पर बिन्दुवार विस्तृत आख्या यथाशीघ्र आयोग को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है, और आदेश की प्रति कार्पोरेशन को भेज दी है।
गौरतलब है कि दिनांक 01 दिसम्बर, 2017 को उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि अब उप्र सरकार वास्तव में किसानों व ग्रामीणों की हितैसी है तो उसे पावर कार्पोरेशन को उपभोक्ता परिषद की याचिका पर उपभोक्ताओं को राहत देने वाला प्रस्ताव भेजवाना चाहिए। उपभोक्त परिषद ने अपने पुनर्विचार प्रत्यावेदन वाली याचिका में आयोग के समाने यह विधिक तथ्य व अनेकों नजीर पेश की थी कि मल्टी ईयर टैरिफ के तहत केवल वर्ष 2017-18 का टैरिफ प्रस्ताव पर प्रदेश में सुनवाई हुई ऐसे में आयोग द्वारा असंवैधानिक तरीके से किस प्रकार ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में एक अप्रैल 2018 के बाद रू0 400 प्रति किलो वाट आदेश निर्गत किया गया यह वर्ष 2018-19 टैरिफ प्रस्ताव से सम्बन्धित था। वणिज्यिक विद्युत उपभोक्ताओं के मिनिमम गारेन्टी जार्च को समाप्त करने का भी मुद्दा उठाया गया था। उपभोक्ता परिषद ने अपनी याचिका में रेगुलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत को समाप्त करने की मांग की है।
उपभोक्ता परिषद ने अपनी याचिका में विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानों तहत जब तक उपभोक्ताओं द्वारा उठाई गयी सभी आपत्तियों का जवाब आयोग को न प्राप्त हो जाय टैरिफ का निर्धारण नहीं हो सकता 13 नवम्बर को आयोग ने बिजली दर सुनवाई में उपभोक्ताओं द्वारा उठाई गयी एक गम्भीर शिकायत पर एक चार सदस्यी कमेटी बनायी गयी थी बिजली कम्पनियों के उदासीनता के चलते अभी तक मामला लम्बित है ऐसे में दरें तय करना गलत था। उपभोक्ता परिषद द्वारा अपने अन्य मुद्दों में लाईफ लाइन विद्युत उपभोक्ताओं की स्लैब को कम करने, का मुद्दा उठाते हुये कहा पहले गरीब शहरी उपभोक्ता 1 किलो 150 यूनिट पर रू0 540 देता था अब उसे 150 यूनिट खर्च करने पर रू0 835 देना पड़ेगा जो गलत है। घरेलू शहरी विद्युत उपभोक्ता के फिक्स चार्ज का समाप्त करने सहित रेगूलेटरी सरचार्ज 4.28 को भी समाप्त करने का मुद्दा उठाया।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा आगे यह भी मुद्दा उठाया था कि पीएफसी रेटिंग सी.ग्रेड बिजली कम्पनियां जिन्होंने कभी भी स्टैण्डर आफ परफार्मेन्श के तहत उपभोक्ताओं को मानक के अन्तर्गत सेवा न देने के लिये आज तक कोई मुवाअजा नहीं दिया ऐसे में रिर्टन आफ इक्यूटी के तहत रू0 1527 करोड़ का फायदा देकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डालने को असैवांधानिक करार दिया गया।
उपभोक्ता परिषद द्वारा बिजली कम्पनियों के कुल ग्रास ओएण्डएम खर्च 6825 करोड़ को अधिक बताते हुये उसमें भी लगभग 1000 करोड़ की कटौती कर उसका लाभ घरेलू ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को देने की शिफारिश की उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने अपने लोकमहत्व विषयक याचिका में यह भी मुद्दा उठाया है कि विद्युत नियमाक आयोग जो एक अर्द्धन्यायिक संस्था है उसके द्वारा राज्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे गये पत्र में पावर कार्पोरेशन के अनुरोध पर 30 नवम्बर, 2017 को टैरिफ जारी करने का जिक्र किया गया जो यह सिद्ध करता है कि पावर कार्पोरेशन के दबाव में आयोग काम कर रहा है जो पूरी तरह टैरिफ प्रक्रिया की पार्दशिता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। एक तरफ उपभोक्ता परिषद नियामक आयोग में अपनी लड़ाई जारी रखेगा दुसरी तरफ उसके द्वारा चलाया जा रहा आन्दोलन यथावत जारी रहेगा।







