नई दिल्ली, 14 जनवरी। यह जानकार हैरानी हो सकती हैं कि मौसम में आए बदलावों से महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा प्रभावित होती हैं। एक शोध में यह खुलासा हुआ है। रिसर्च के मुताबिक सर्दियों में महिलाएं छोटे दिनों और ठंडे तापमान के कारण सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर का शिकार हो जाती हैं। जिसके कारण महिलाओं में मूड खराब,चिड़चिड़ापन और थकावट जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।
हालांकि इसके लक्षण सर्दियों में ज्यादा पाए जाते हैं जब,हालांकि महिलाओं में ये साल भर मौजूद रहते हैं। गर्मियों में लंबे दिनों के कारण महिलाएं पुरूषों को मुकाबले ज्यादा थक जाती है। स्कॉटलैंड की ग्लासगो यूनिवर्सिटी में कराई गई इस शोध में 150,000 मध्मम वर्ग के वयस्कों को शामिल किया गया।
शोधकर्ताओं ने अवसादग्रस्तता के लक्षण और उदासी,तनाव और थकान के जरिए विश्लेषण किया। स्टडी में यह बात सामने आई कि महिलाएं ज्यादा थकी हुई पाई गईं। इस स्टडी में पहले की स्टडी की भी पुष्टि की जिसमें पाया गया था कि मौसम में बदलावों से महिलाओं में अवसाद बढ़ता है।
सीजनल अफेक्टिव डिसॉर्डर दिन के छोटा होने से शुरू होता है और दिसंबर,जनवरी,फरवरी में ज्यादा बढ़ जाता है और वसंत के सीजन में इसमें सुधार आ जाता है। सीजनल अफेक्टिव डिसॉर्डर को विंटर ब्लू कहा जाता है,क्योंकि इसके लक्षण सीजन के साथ शुरू होते हैं और सीजन के साथ ही खत्म हो जाते हैं। आपको बता दें कि अमेरिका में 10 मिलियन लोग सीजनल अफेक्टिव डिसॉर्डर के शिकार हैं। इसके शिकार लोग सुस्त,उदास मन, रोज के कामों में कम दिलचस्पी दिखाना,चिड़चिड़ापन शामिल हैं।
सैड यानी सीजनल अफेक्टिव डिसॉर्डर मनोदशा से संबंधित एक बीमारी है, जिसे हर साल एक ही समय पर होने वाले अवसाद के रूप में पहचाना जाता है। यह मौसम के मिजाज से संबंधित विकार है। मौसम के बदलने पर थकान, अवसाद, निराशा आदि सीजनल अफेक्टिव डिसॉर्डर के लक्षण हैं। सर्दियों के मौसम में ठंड के बढ़ने के साथ शरीर को सूरज की रोशनी सही मात्रा में नहीं मिल पाती, जिस कारण हमारे शरीर का बायोलॉजिकल क्लॉक सिस्टम बिगड़ जाता है।







