बेरोजगारी के मौसम में रोजगार का स्कोप
नवेद शिकोह
लखनऊ,16 जनवरी। नफरत और बेरोजगारी के माहौल में नोट कमाने का सीजन चल रहा है। एक साहब को जेल जाना था, नहीं गये। मैंने उनसे पूछा- आप अभी तक जेल नहीं गये! बोले- अब जेल नहीं राज्यसभा जाना है। रोज एक नया बयान देकर उसी की तैयारी कर रहा हूँ। इन भावी सांसद ने मुझसे भी पूछा – तुम आजकल क्या कर रहे हो? मैंने कहा- बेरोजगार हूँ। बोले मैं तुम्हें काम दूँगा। किस तरह का काम! मेरा सर कलम करने पर दस लाख का इनाम घोषित कर दो। जिसके एवज मे मैं तुम्हें एक लाख दूँगा। जेल हो गयी तो 15-20 हजार रुपये खर्च करके जमानत करा लेना। बेरोजगारी और गुमनामी के अंधेरों से बाहर निकल आओगे। दौलत भी मिलेगी और शोहरत भी। ये दोनो ताकतें तुम्हें लाल बत्ती भी दे सकती हैं। संसद या विधान सभा का भी ये शार्टकट रास्ता है। मैं इसी रास्ते से राज्य सभा जा रहा हूँ।
.. इतने में भावी सांसद का फोन बजा। विदेश से आया था फोन, लेकिन आवाज सुनी-सुनाई, जानी-पहचानी थी। । शरीफ भाई जिनके साथ मिलकर हर इतवार को हम लोग कमीशन पर दूसरों के मुर्गी-मुर्गे और कबूतर बेचते है, ये आवाज उनकी लगी। इस इतवार को शरीफ भाई गायब थे।
….. शाम को टीवी पर भी शरीफ भाई जैसी आवाज सुनी। तस्वीर नहीं थी। तस्वीर की जगह काली छाया जैसी थी। जिसपर लिखा था- दाउद का गुर्गा।
दोनों आवाज़ों और बातों को मैच किया तो समझ गया शरीफ जो कल तक मेरे साथ नक्ख़ास में मुर्गा बेचता था आज भावी सांसद का मुर्गा अजान दे रहा है। दिलचस्प बात ये है कि दाउद का गुर्गा कहला रहा है।
शरीफ की कमजोर और सहमी-समही आवाज साफ-साफ पोल खोल रही थी कि मुर्गा बेचने वाले को दाउद का गुर्गा बनाकर पेश किया गया है।
मुझे अब अपना असाइनमेंट करने का सबक हो गया। किसी का सर काटने पर दस लाख के इनाम की घोषणा में खनक और हुनक ज़रूर पैदा करेंगे । मैं खूब प्रैक्टिस के बाद ही सर काटने पर इनाम की घोषणा करुंगा। नहीं लोग यही कहेंगे कि जिसके पास बाल कटवाने के पचास रूपए नहीं वो किसी का सर कटवाने के पचास हजार क्या ख़ाक देगा।







