यहां स्थिति इतनी खराब है कि तापमान मापने के लिए लगाया गया थर्मामीटर भी ठंड के कारण टूट गया
नई दिल्ली, 18 जनवरी। रूस के साइबेरियाई गांव ओइमयाकन में तापमान शून्य से 62 डिग्री सेल्सियस नीचे जा पहुंचा है। इसे धरती का सबसे सर्द बसाहट वाला स्थान कहा जा रहा है। यहां स्थिति इतनी खराब है कि तापमान मापने के लिए लगाया गया थर्मामीटर भी ठंड के कारण टूट गया।
लोगों को दावा है कि उनके निजी थर्मामीटरों में तापमान -67 डिग्री सेल्सियस तक रिकॉर्ड हुआ है। इतनी ठंड में लोगों के सिर के बाल और पलकें तक जम गई है। इतनी ठंड में लोगों की पलकें तक जम गई हैं। लोगों ने अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाली हैं। जनवरी महीने में आमतौर पर यहां औसत तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस नीचे होता है।
सभी स्थान बर्फ से जमे हुए हैं। इससे पहले गांव में 1933 में तापमान -68 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बड़ा थर्मामीटर लगाया गया था लेकिन अत्यधिक ठंड में वह भी टूट गया। गांव के सभी घर बर्फ की मोटी परत से ढके हैं। लोगों को पेन की इंक जमने से लेकर बैटरी बंद होने जैसी स्थितियों से जूझना पड़ता है। यहां वाहनों को दिनभर चालू रखना पड़ता है।
धरती का सबसे ठंडा स्थान दक्षिणी धु्रव पर मौजूद अंटार्कटिका:
धरती का सबसे ठंडा स्थान दक्षिणी धु्रव पर मौजूद अंटार्कटिका है। लेकिन यह निर्जन है। वहां तापमान -89 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। 2013 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने उपग्रह से अंटार्कटिका का तापमान -94.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया था।
चीन में तो कुछ जगहों पर तो पारा इतना नीचे लुढ़क गया कि सड़कों पर बर्फ की मोटी चादर बिछ गई और यहां इस छोटे बच्चे के सिर के बाल जम गए। चीन के शिंजी प्रांत में बीते दिनों दस वर्षीय बालक जब अपनी कक्षा में दाखिल हुआ तो उसके सिर के बाल पूरी तरह बर्फ में जमे हुए थे। दरअसल तीसरी कक्षा में पढ़ने वाला यह छात्र तकरीबन पांच किमी दूर से पैदल चलकर आता था।
स्कूल में परीक्षाएं चल रही थीं, इसलिए ठंड होने के बावजूद भी वह स्कूल के लिए निकला। लेकिन रास्ते में अचानक तापमान तेजी से नीचे गिर गया। ऐसे में बच्चे के सिर के बाल जम गए। लिहाजा पहले उसे गर्म तापमान में रखा गया और फिर परीक्षा ली गई।
यूरोप में ठंड का कहर इस कदर बढ़ गया है कि इसका असर ऐसे इलाकों पर भी दिख रहा है जहां पानी की एक बूंद भी नहीं है। यूरोप के सहारा रेगिस्तान में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहां के एक शहर में बीते दिनों 16 इंच तक बर्फबारी हुई है।
बीते 37 साल में यह तीसरा मौका है, जब अल्जीरिया के ऐन सेफरा शहर में बर्फबारी हुई और लाल रेत के टापुओं पर बर्फ की सफेद चादर फैल गई। फ्रांस में लगातार हो रही बर्फबारी से हालात विकट होते जा रहे हैं जिस कारण आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
मुख्य मार्ग पर स्थित वाल डी सेरे गांव में बर्फ की चादर बिछ गई है। मौसम विभाग ने यहां भूस्खलन की चेतावनी जारी की है। ठंड ने इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कनाडा में कुछ जगह तो ऐसी भी हैं जहां पारा माइनस 30 के नीचे चला गया है। घर के बाहर खड़ी गाड़ियां बर्फ की चादर से ढंक गई है। ठंड का आलम ये है कि करीब एक किलोमीटर के दायरे में बहने वाला अमेरिका-कनाडा बॉर्डर पर स्थित नियाग्रा वॉटरफॉल जम कर बर्फ में तब्दील हो गया है।







