- बिजली कम्पनियों में निजीकरण के विरोध में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं द्वारा आज पूरे प्रदेश में चलाया गया जन जागरण अभियान और निजीकरण के दुष्प्रभावों से सदस्यों को कराया गया अवगत।
- एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्य समिति ने जन जागरण अभियान की समीक्षा की और आगे भी जन जागरण अभियान चलाने का दिया निर्देश।
लखनऊ, 12 फरवरी। प्रदेश के उर्जा सेक्टर में दलितो व पिछडों की शीर्ष संगठन उप्र आॅफिसर्स एसोसिएशन के निर्देश पर आज पूरे उप्र में एसोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा पावर कार्पोरेशन के निजीकरण की प्रक्रिया का विरोध करते हुए उन्हें उसके दुष्प्रभाव से अवगत कराया।
गौरतलब है कि पावर कार्पोरेशन द्वारा ‘‘एकीकृत सेवा प्रदाता‘‘ (इन्टीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर) के नाम पर सात सर्किल उरई, इटावा, कन्नौज, रायबरेली, सहारनपुर, बलिया, मऊ के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गयी है, जिसके विरोध में आज से एसोसिएशन द्वारा जनजागरण अभियान शुरू किया गया है।
जन जागरण अभियान सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में सम्पन्न होने के उपरान्त एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्यसमिति की एक बैठक फील्ड हास्टल कार्यालय में सम्पन्न हुई और पूरे प्रदेश में जनजागरण अभियान की समीक्षा की गयी। समीक्षा के बाद उप्र पावर आफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केबी राम, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन, संगठन सचिव व लेसा अध्यक्ष अजय कुमार, संगठन सचिव इं. राधेश्याम, इं. रामशब्द इं. अरविन्द सिंह अजय कनौजिया ने कहा कि यह जन जागरण अभियान लगातार चलता रहेगा और प्रदेश के सभी दलित व पिछड़े वर्ग के कार्मिकों को प्रथम चरण में निजी करण के दुष्प्रभाव से अवगत कराने के उपरान्त अगले चरण में निजी करण के विरोध में आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया जायेगा।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा कि निजी करण का पहला प्रयोग नोएडा पावर कम्पनी जो ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में वितरण का काम कर रही है, वह पूरी तरह अपने निजी स्वार्थ में काम कर रही है। इसी प्रकार आगरा की टोरेन्ट पावर का उदाहरण भी सबके सामने है। इसके बावजूद भी निजी करण की पहल करना पूरी तरह प्रदेश व कार्मिक हितों के विपरीत है।






