प्रो. केदार नाथ सिंह के देहांत पर प्रो. शारिब रुदौलवी का शोक संदेश
लखनऊ, 20 मार्च। प्रो. केदार नाथ सिंह के देहांत से भारतीय साहित्य और हिन्दी की आधुनिक कविता को जो नुकसान पहुँचा है वह कभी पूरा नहीं हो सकता। केदार नाथ सिंह के देहांत पर अफसोस ज़ाहिर करते हुए उर्दू के प्रसिद्ध साहित्यकार और आलोचक डा. शारिब रुदौलवी ने अपने गम का इज़हार करते हुए कहा है कि केदार नाथ सिंह ने नई कविता को जीवन धारा से जोड़ा। वह मशहूर कवि थे। उन्हें बहुत से एवार्ड मिले जिसमें ज्ञानपीठ पुरस्कार भी शामिल है। उनकी कविताँए ऊँच नीच, मिठास और तीखापन सब उनके शब्दों और उनके सिम्बल में मिल जाता है। वह एक बड़े कवि के साथ एक बहुत अच्छे इनसान भी थे। किसी तरह का भेदभाव नहीं था। वो जे.एन.यू के भारतीय भाषा केन्द्र में प्रोफेसर थे और सारी भाषाओं को अपनी भाषा समझते थे।
वह आधुनिक कवि थे लेकिन अपनी सोंच में वह प्रगतिशील थे। यही वजह की उनकी कवितांए हमारे जीवन से जुड़ी हुई हैं। वह मेरे भारतीय भाषा केन्द्र के साथियों मे थे। और हमने बहुत समय एक साथ गुज़ारा है। एक अच्छे इंसान, एक बड़े सहित्यकार और कवि की सूरत में उनको कभी भुलाया नहीं जा सकता। केदार नाथ सिंह हमारे साहित्यिक इतिहास का हमेशा हिस्सा रहेंगे।

फेसबुक प्रतिक्रिया:
केदार जी की अंतिम यात्रा। दिग्गज हिंदी कवि को अंतिम विदाई देने लोधी रोड के श्मशान गृह में उनके परिजनों, मित्रों, समकालीन रचनाकारों और प्रशंसकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही।
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अभिनंदन है कविता की इस पुकार का,जो मौन दिशाओं में कहीं खो गयी।
Bharat Prasad







