मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के पूरे चुनावी अनुष्ठान पर नजर दौड़ाइये:
नवेद शिकोह
- चुनाव संचालन कमेटी में 10 वरिष्ठ रिटायर्ड पत्रकार।
- रामदत त्रिपाठी जी और गोस्वामी जी जैसे दो-चार रिटायर्ड पत्रकार रणनीतिकार।
- कुछ संभावित प्रत्याशियों में प्रांशु मिश्रा जी(बड़े मीडिया ग्रुप के)और हेमंत तिवारी जी(रिटायर/स्वतंत्र/ ब्रांड पत्रकार) जैसे सिर्फ और सिर्फ दो-तीन प्रतिशत ही दावेदार सामने आ सकते हैं।
- बाकी 97%सब के सब बहुत छोटे-छोटे अखबारों/पोर्टल के ही मीडिया कर्मियों की ही इस चुनाव में सहभागिता नजर आ रही है।
- पूरा खतरा बना है कि इन छोटे-छोटे अखबारों का जल्द ही खात्मा हो जायेगा।
- और बड़े मीडिया घराने अपने पत्रकारों को पत्रकारों के संगठनों से दूर करते जा रहे हैं। तो फिर भविष्य में पत्रकार समिति की परम्परा को कौन जिन्दा रखेगा ?
- रिटायर पत्रकारों का खाली समय ही पत्रकारों की इस चुनाव परम्परा को खाद्य पानी दे सकते
- हैं।
चुनावी अनुष्ठान से क्यों दूर होते जा रहे हैं बड़े पत्रकार:
- ब्रांड अखबारों की अपेक्षा ब्रांड न्यूज चैनल्स के पत्रकारों की आजादी अभी बरकरार है।
- प्राप्त संवाददाता समिति का इतिहास खंगालये तो पता चलेगा कि पहले समिति के पदाधिकारी ब्रांड मीडिया के पत्रकार हुआ करते थे। वक्त के साथ पत्रकारों की आजादी छिनती गयी। मीडिया के मालिकों और प्रबंध तंत्र ने पत्रकारों की आजादी के पंख कतरना शुरु कर दिये। पहले पत्रकारों के संगठनों में शामिल होने पर पाबंदी लगी और अब वोट डालने की भी मनाही हो गयी है।
- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों की आजादी थोड़ी-बहुत बची है लेकिन ब्रांड अखबार का मैनेजमेंट पत्रकारों पर कुछ ज्यादा ही हावी होता जा रहा है।
- लगभग पिछले दस वर्षों से बड़े अखबार मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति में चुनाव लड़ने के लिए अपने पत्रकारों को इजाजत नही दे रहे हैं। टाइम्स आफ इंडिया और सहारा ग्रुप के अलावा टाप थ्री अखबारों के पत्रकार चाह कर भी समिति का चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं।
- मजीठिया जैसे दबाव से कुंठित इन अखबारों ने अब अपने पत्रकारों का मताधिकार भी छीन लिया है। ऐसे चुनावों में वो वोट नहीं डाल पायेंगे।
- नंबर वन का दावा करने वाले एक अखबार के पत्रकार पिछले दो चुनावों से समिति के चुनाव में अपने मताधिकार से वंचित कर दिये गये है।
- इस बार समीति के चुनाव में एक और अखबार के पत्रकार चुनाव में अपनी सहभागिता से महरूम रहेंगे।
- बड़े मीडिया समूह में कार्यरत जो मीडिया कर्मी चुनाव में अपनी भूमिका निभा रहे हैं उनकी कद्र कीजिए। वो पत्रकारों को संगठित करने की नेक नियत के जज्बे के आगे अपनी नौकरी का रिस्क ले रहे हैं।







