- एसोसिएशन का बड़ा आरोप जो वर्तमान सरकार पिछली सरकारों के फैसलों की करती है आलोचना और वहीं दूसरी ओर टोरेन्ट पावर के पूर्व सरकार के निर्णय को आधार बनाकर 5 शहरों का ले लिया कार्मिक विरोधी निजीकरण का फैसला।
- टोरेन्ट पावर का उदाहरण देने के पहले सरकार इस पर करे विचार कि आगरा में फ्रेजाईजी शुरू होने के पहले जो रू. 1147 करोड़ का था बकाया वह कहां चला गया
लखनऊ, 29 मार्च। निजीकरण के विरोध में उप्र पावर आफीसर्स एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्य समिति की बैठक में आज पूरे आन्दोलन की समीक्षा की गयी और प्रदेश भर के दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं के लिये सर्कुलर जारी किया गया है कि वह आन्दोलन में भाग लेकर अपनी पूरी ताकत दिखाकर सरकार को यह दिखा दें कि निजीकरण का फैसला सरकार के लिये पूरी तरह असंभव साबित होगा।
जो वर्तमान भाजपा सरकार एक तरफ सपा व बसपा सरकार में लिये गये निर्णयों की हर मौके पर आलोचना से नहीं चूकती, वही उप्र की सरकार अब पिछली सरकारों में कार्मिक विरोधी टोरेन्ट पावर के निर्णय को आधार बनाकर 5 शहरों के निजीकरण का फैसला ले रही है। इससे ऐसा साबित होता है कि वर्तमान सरकार का निजीकरण का फैसला उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिये है, क्योंकि टोरेन्ट पावर के मामले में सीएजी रिर्पोट में यह खुलासा हो चुका है कि गलत निर्णय व अनुबन्ध में अनियमितता के चलते कुल लगभग 5 हजार करोड़ का घाटा टोरेन्ट पावर का अनुबन्ध पूरा होने तक हो जायेगा।
उन्होंने कहा कि जिन 5 शहरों का चयन किया गया उससे ऐसा प्रतीत होता है कि निजी घरानों को बड़ा फायदा पहुंचाने के लिये यह कदम उठाया गया क्योंकि इन शहरों का थ्रो रेट रू. 5 से लेकर रू. 6.50 के बीच है। दूसरा सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस टोरेन्ट पावर आगरा का उदाहरण देकर आगे निजीकरण किया जा रहा है और यह कहा जा रहा है कि 5 वर्षों में टोरेन्ट पावर द्वारा वितरण को सुदृढ़ करने के लिये रू. 827 करोड़ का निवेश किया गया क्या उप्र सरकार को यह नहीं मालूम है कि जब टोरेन्ट पावर को फ्रेन्जाईजी दी गयी थी आगरा के विद्युत उपभोक्ताओं पर रू0 1147 करोड़ का मूल बकाया था। बकाया वसूल करके ही टोरेन्ट माला-माल हो जायेगा।
उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन, संगठन सचिव, अजय कुमार, राधेश्याम, पीपी सिंह, अजय कनौजिया, आनन्द कनौजिया, चन्द्रशेखर व विकास दीप ने कहा पूरे प्रदेश में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ता आन्दोलित हैं, जिस प्रकार से पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन मनमाने तरीके से बिजली विभाग में निर्णय करा रहा है, उससे आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र को तबाही के रास्ते पर जाने से कोई नहीं रोक पायेगा। एक तरफ पावर कार्पोरेशन उदय स्कीम की सफलता के नाम पर पूरे प्रदेश के अभियन्ताओं से रात दिन काम कराने पर आमादा है और वहीं दूसरी ओर निजीकरण का फैसला लेकर यह साबित कर दिया है कि पावर कार्पोरेशन को निजी घरानों की ज्यादा चिन्ता है, जिसे एसोसिएशन कामयाब नहीं होने देगा।







