- प्रदेश के 50 लाख अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में लागू होगी 34 प्रतिशत की वृद्धि
- उत्तराखण्ड सरकार ने विगत दिनों बिजली दरों में की कमी फिर उप्र सरकार को प्रदेश की जनता की चिन्ता क्यों नहीं?
लखनऊ, 30 मार्च। जहां एक तरफ उप्र सरकार बिजली निजीकरण करके प्रदेश की जनता को संकट में डालने की तैयारी कर रही है। वहीं अभी प्रदेश के लगभग 50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की जो वर्तमान दरें रू. 300 प्रतिकिलोवाट प्रतिमाह है, वह 1 अप्रैल, 2018 से रू0 400 प्रति किलोवाट प्रतिमाह स्वतः आयोग आदेशानुसार हो जायेगी। बड़ी चालाकी से जब 30 नवम्बर,2017 को उप्र सरकार ने दबाव डालकर प्रदेश के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी करायी गयी थी। जिसमें पहले जो ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ता रू0 180 प्रति किलोवाट प्रतिमाह देते थे, उसमें बढ़ोत्तरी करके रू0 300 और 1 अप्रैल,2018 से रू0 400 प्रति किलोवाट प्रतिमाह करा दिया गया था।
यानि कि 1 अप्रैल, 2018 से ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 34 प्रतिशत की वृद्धि हो जायेगी। वहीं एक तरफ विगत दिनों उत्तराखण्ड सरकार ने अपनी बढ़ी बिजली दरों में कमी की, लेकिन उप्र सरकार को इस दिशा में कोई भी चिन्ता नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे मामले पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा दाखिल पुनर्विचार याचिका जिस पर आयोग ने पावर कार्पोरेशन से जवाब लेकर बिना कार्यवाही किये मामला लम्बित रखा है। क्योंकि उप्र सरकार नहीं चाहती है कि जनता को राहत मिले। उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ योगी से इस मामले पर हस्तक्षेप करने की मांग की है और यह निवेदन किया है कि जब तक उपभोक्ता परिषद की पुनर्विचार याचिका पर आयोग कोई निर्णय न दे दे तब तक सरकार विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत 1 अप्रैल से बढ़ रही बिजली दरों पर रोक लगाने के लिये नियामक आयोग से मांग करे।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौसिल के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि 1 अप्रैल से 50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में जो बढ़ोत्तरी हो रही है, वह असंवैधानिक है। क्योंकि पावर कार्पोरेशन व बिजली कम्पनियों द्वारा मल्टीईयर टैरिफ प्रस्ताव के तहत केवल वर्ष 2017-18 का टैरिफ प्रस्ताव आयोग में दाखिल किया गया था और एक ही वित्तीय वर्ष पर सार्वजनिक सुनवाई हुई थी। ऐसे में जब तक नया टैरिफ पुनः आयोग द्वारा न जारी किया जाये, तब तक वर्ष 2017-18 की ही टैरिफ नियमानुसार लागू रहना चाहिए, लेकिन पावर कार्पोरेशन व सरकार ने एकल मेम्बर कमीशन पर दबाव डालकर 1 अप्रैल,2018 से ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में रू0 300 प्रति किलोवाट प्रतिमाह की जगह रू0 400 प्रति किलोवाट प्रतिमाह जारी करा लिया था।







