- 50 लाख अनमीटर्ड घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में सुनियोजित तरीके से साजिश कर करायी गयी 1 अप्रैल, 2018 से 34 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
- निजी घरानों का हमेशा से रहा है दबाव कि ग्रामीणों की दरों में हो व्यापक बढ़ोत्तरी तभी निजीकरण को मिलेगा बढ़ावा
लखनऊ, 31 मार्च। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि प्रदेश के लगभग 50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 34 प्रतिशत की वृद्धि के पीछे निजी घरानों की बड़ी साजिश है। क्योंकि उप्र सरकार को पहले से ही पता था कि उसे अप्रैल माह से ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण/फ्रेन्चाइजीकरण करना है। इसलिये ग्रामीण अनमीटर्ड घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की मौजूदा रू0 300 प्रतिकिलोवाट प्रतिमाह की दर में कल 1 अप्रैल, 2018 से रू0 400 प्रति किलोवाट प्रतिमाह की वृद्धि असंवैधानिक तरीके से पहले ही करा ली गयी थी, जो अब लागू की जा रही है।
सभी निजी घराने फ्रेन्चाइजी व निजीकरण पर आगे बढ़ने के पहले ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में सबसे ज्यादा इजाफा कराने के पक्षधर होते हैं उनका हमेशा से मत रहा है कि ग्रामीण की दरों में बढ़ोत्तरी से निजीकरण को मिलेगा बल और अब जब निजीकरण का फैसला सामने आ गया है तो यह पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि उप्र सरकार व पावर कार्पोरेशन ने बड़ी चालाकी से ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं पर बड़ा बोझ डाल दिया।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौसिल के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जब इस असंवैधानिक वृद्धि पर उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी जो अभी भी विचाराधीन है। उस पर पावर कार्पोरेशन की ओर से नियामक आयोग को जो जवाब भेजा गया था उसमें जो बात लिखी गयी थी वह बेहद चौकाने वाली थी। उसमें इस मुद्दे पर यह जवाब दिया गया है कि टैरिफ शाॅक पर विचार करते हुए चरण बद्ध रूप से वृद्धि की गयी है। इसलिये आयोग द्वारा वर्ष 2018-19 हेतु भी ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की वृद्धि द्वितीय चरण के लिये भी अनुमोदित की गयी है।
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सवाल यह उठता है कि जब पूरे प्रदेश में बिजली दर पर सुनवाई सभी श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं के लिये वर्ष 2017-18 की की गयी और पावर कार्पोरेशन का प्रस्ताव भी इसी वर्ष के लिये था। फिर केवल गरीबों की एक श्रेणी अनमीटर्ड 50 लाख ग्रामीण घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों को वर्ष 2018-19 के लिये द्वितीय चरण के लिये वृद्धि करना पूरी तरह असंवैधानिक है। जो यह सिद्ध करता है कि निजी घरानों को लाभ देने की नियत से अप्रैल माह में सुनियोजित तरीके से वृद्धि करायी गयी थी।







