.एससी-एसटी एक्ट मामले में सरकार पर बढ़ा दबाव
.2 अप्रैल को दलित संगठनों ने भारत बंद का किया है आह्वान
नई दिल्ली, 01 अप्रैल। एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा संशोधन किये जाने के फैसले के बाद विपक्ष की आलोचना का शिकार हो रही नरेंद्र मोदी सरकार सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल कर सकती है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने को मंजूरी दे दी है। इसी मुद्दे को लेकर 2 अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा भारत बंद का आह्वान किया है।
गौरतलब है कि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष के अलावा एनडीए के दलित और पिछड़े वर्ग से आने वाले जनप्रतिनिधियों ने भी मोदी सरकार से रिव्यू पिटिशन दाखिल करने की मांग की थी। इसके अलावा एनडीए के कुछ सहयोगी दलों ने भी नाखुशी जाहिर की थी।

लोगों में कानून का भय खत्म होने का तर्क दे सकती है सरकार
सरकारी सूत्रों के अनुसार सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय द्वारा दाखिल किए जाने वाली इस याचिका में एससी और एसटी एक्ट 1989 के प्रावधान कोर्ट के फैसला के बाद कमजोर हो जाएंगे, ऐसा तर्क दिया जा सकता है। याचिका में सरकार मौजूदा आदेश के बाद लोगों में कानून का भय खत्म होने का भी तर्क दे सकती है।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) एक्ट-1989 में बदलाव करते हुए गैर जमानतीय धाराओं को कमजोर कर दिया है। अब कोर्ट की जगह आरोपी को थाने से भी जमानत मिल सकती है। इसी के बाद से विभिन्न दलित संगठन और विपक्ष सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने का दबाव बना रही है।
कांग्रेस ने कहा था कि सरकार को रिव्यू पिटिशन दाखिल करना चाहिए और अगर वह ऐसा नहीं करती तो यह उसके पाखंड को उजागर करेगा। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के सांसदों ने इसे लेकर संसद भवन परिसर में गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना भी दिया था।







