.शिक्षामित्रों ने कहा: सर, बेटियों का विवाह नहीं हो पा रहा है?
.पूर्व मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों के परिवारीजनों को, आर्थिक बदहाली से उबारने के लिए 50-50 लाख रूपए की सहायता दिए जाने की राज्य सरकार से की मांग
लखनऊ, 02 अप्रैल। शिक्षामित्रों का प्रतिनिधिमण्डल आज सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव से मिला और उन्हें ज्ञापन देकर अपना दुःख दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि हम लोग इन दिनों बड़ी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं। बेटियों का विवाह नहीं हो पा रहा है। बैंकों से जो कर्ज लिया था उसकी वसूली होने लगी है। राज्य सरकार को उनकी बदहाली की कोई चिंता नहीं है। प्रतिनिधिमण्डल के सदस्यों ने कहा कि सपा सरकार ने उनके साथ न्याय किया था जबकि भाजपा सरकार ने तो उनके साथ अन्याय और अत्याचार किया है।
शिक्षामित्रों ने यह भी बताया कि अब तक 537 शिक्षामित्रों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों की संख्या में आत्महत्या कर ली है। कुछ सदमा बर्दास्त नहीं कर सके और मौत हो गयी। पीड़ित परिवारों में बहुत आक्रोश है। उन्होंने मांग की कि 1,24,000 स्नातक प्रशिक्षित शिक्षामित्रों को पैराटीचर मानते हुए 38,878 रूपए 12 माह का वेतन दिया जाए। सेवाकाल 62 वर्ष हो। मृतक शिक्षामित्रों के परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दी जाए। शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर रहते हुए टेट पास करने के लिए 4 वर्ष का समय दिया जाए। जिनका समायोजन नहीं हुआ है उनको समान कार्य का समान वेतन दिया जाए।
उन्होंने शिक्षामित्रों की मांगों पर सहानुभूति जताते हुए मृतक शिक्षामित्रों के परिवारीजनों को, आर्थिक बदहाली से उबारने के लिए 50-50 लाख रूपए की सहायता दिए जाने की राज्य सरकार से मांग की। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार में शिक्षामित्रों को समायोजन का जो लाभ मिला था उसे बरकरार रखा जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमण्डल में श्रीमती उमा देवी (कानपुर) रेखा चौधरी (मथुरा) श्रीमती रमाकांती त्रिपाठी (महाराजगंज) तथा सर्वश्री राजीव कुमार (रामपुर) रीतेश द्विवेदी (कासगंज) सुशील यादव (लखनऊ) श्याम जी दुबे, संतोष दुबे, महेश उपाध्याय सभ शिक्षामित्र शामिल थे। इस अवसर पर सर्वश्री अहमद हसन, राजेन्द्र चौधरी, नरेश उत्तम पटेल, अरविन्द सिंह गोप, एसआरएस यादव तथा अरविन्द कुमार सिंह भी मौजूद थे।







