सरकार ने नये गाइडलाइंस पर लगाई रोक
नई दिल्ली, 03 अप्रैल। फेक न्यूज देने पर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने के फैसले पर मोदी सरकार ने तत्काल रोक लगा दी है। पीएमओ ने पूरे मामले में दखल देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के फैसले को वापस लेने की बात कही। पीएमओ की तरफ से ये भी कहा कि इससे संबंधित प्रेस रिलीज वापस ली जाए और इस मुद्दे को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और प्रेस संगठनों पर छोड़ देने की बात कही गयी।
सोमवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन में कहा गया था कि फेक न्यूज करने वाले पत्रकारों की मान्यता हमेशा के लिए रद्द हो सकती है। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए संशोधित दिशा निर्देशों में यह व्यवस्था की गई थी।
विपक्ष ने उठाये थे सवाल:
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नये गाइडलाइंस पर विपक्ष के नेताओं ने सवाल उठाये थे। कांग्रेस के सीनियर लीडर अहमद पटेल ने इसे पत्रकारों को खुलकर न्यूज रिपोर्टिंग करने से रोकने की मंशा से उठाया गया कदम बताया था। ट्विटर के जरिए अहमद पटेल ने नये नियमों पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को घेरा था।
क्या गारंटी है,.. पत्रकारों का शोषण नहीं किया जाएगा?
उन्होंने ट्वीट कर पूछा इसकी क्या गारंटी है कि इन नियमों से ईमानदार पत्रकारों का शोषण नहीं किया जाएगा?, फेक न्यूज में क्या-क्या हो सकता है इसका फैसला कौन करेगा? वही कुछ नेताओं ने निंदा करते हुए इस सेंसरशिप को गलत बताया। वही वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने कहा था कि यह कोई गाइडलाइंस नहीं है बल्कि नई बोतल में पुरानी शराब की तर्ज पर सेंसरशिप लगाने जैसा है।
क्या थी नयी गाइडलाइंस
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी नयी गाइडलाइंस में कहा गया कि अगर कोई पत्रकार फेक न्यूज देता या उसे प्रचारित करता पाया गया तो उसकी मान्यता हमेशा के लिए रद्द हो सकती है। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए संशोधित दिशानिर्देशों में यह व्यवस्था की गई है। सरकार की ओर से कहा गया है कि पहली बार फेक न्यूज के प्रकाशन अथवा प्रसारण की पुष्टि होने पर मान्यता प्राप्त पत्रकार की मान्यता छह माह के लिए निलंबित की जाएगी. दूसरी बार ऐसा होने पर यह कार्रवाई एक साल के लिए होगी। लेकिन तीसरी गलती पर मान्यता हमेशा के लिए रद्द कर दी जाएगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, प्रिंट मीडिया से संबंधित फेक न्यूज की शिकायत को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से संबंधित शिकायत को न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) को भेजा जाएगा। ये दोनों संस्थाएं ही तय करेंगी कि जिस खबर के बारे में शिकायत की गई है, वह फेक न्यूज है या नहीं. दोनों को यह जांच 15 दिन में पूरी करनी होगी।







