आंधी तूफान व ओलावृष्टि से प्रभावित प्रदेश के 50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीणों की बढ़ी दरों पर अगले 6 माह तक सरकार से रोक लगाने की उपभोक्ता परिषद ने उठायी मांग
लखनऊ, 08 अप्रैल। पिछले दिनों आएं पूरे प्रदेश में आकस्मिक आंधी तूफान व ओलावृष्टि से किसानों की फसलें अनेकों जनपदों में तबाह हो गयी, जिससे उनके सामने काफी विषम परिस्थितियां खड़ी हो गयी हैं। उपभोक्ता परिषद इसके मद्देनजर उप्र सरकार से यह मांग करती है कि विगत दिनों 50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरें रू. 300 प्रतिकिलोवाट प्रतिमाह जो 1 अप्रैल से रू. 400 प्रतिकिलोवाट प्रतिमाह हो गयी हैं, फिलहाल उस पर सरकार पुनर्विचार करते हुए अगले 6 माह के लिये स्थगित कर पुरानी दरों पर ही बिजली बिल की वसूली कराये, ताकि गरीब जनता व किसानों को राहत मिल सके।
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि हम प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से यह भी मांग करते है कि ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं, किसानों पर लगने वाले रेगुलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत की वसूली को भी फिलहाल समाप्त कर दिया जाये। उन्होंने कहा कि इस विषम परिस्थिति में पूरे प्रदेश के हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है कि वह देश के अन्नदाता के साथ खड़ा हो। पूर्व वर्षों में इस प्रकार की राहत अनेकों राज्य सरकारों हरियाणा, राजस्थान, द्वारा अपने किसानों को दी जा चुकी है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस समय पूरे प्रदेश का किसान आंधी तूफान व ओलावृष्टि से काफी आहत है, उसकी फसलें बर्बाद हो गयी हैं। ऐसे में उप्र सरकार बिजली जैसी आवश्यक सेवाओं के मामले पर उसे राहत देने के लिये यदि विचार करेगी तो प्रदेश का किसान उसका आभारी रहेगा।
जिस प्रकार से विगत दिनों उप्र पावर कार्पोरेशन द्वारा प्रदेश के ग्रामीण व किसानों की दरों में 50 से 150 प्रतिशत की वृद्धि करायी गयी थी, उससे किसान अभी उबरा भी नहीं था कि प्रकृति का उसपर कहर बरस गया। ऐसे में प्रदेश का अन्नदाता यदि संकट में रहेगा तो निश्चित तौर पर यह पूरे प्रदेश के लिये अपमानजनक स्थिति होगी। इस लिये उपभोक्ता परिषद इस गम्भीर मामले पर उप्र सरकार से राहत की मांग करता है।







