- संघर्ष समिति ने बिजली, कृषि, सिंचाई व लोक निर्माण विभाग के जारी किये आंकड़े कहा इसके लिये केन्द्र की मोदी सरकार जिम्मेदार।
- बाबा साहब की जयन्ती मनाने का दिखावा करने मात्र से नहीं चलेगा काम केन्द्र की मोदी सरकार दलितों के संवैधानिक अधिकार के लिये पदोन्नति में आरक्षण बिल अविलम्ब कराये पास।
लखनऊ, 15 अप्रैल। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र की प्रान्तीय कार्यसमिति की बैठक में आज पदोन्नति में आरक्षण बिल पर चर्चा करते हुए संघर्ष समिति ने केन्द्र व उप्र की सरकार पर हमला बोला कहा कल जब पूरे देश में बाबा साहब की जयन्ती धूमधाम से मनायी गयी, उस समय केन्द्र की मोदी सरकार बाबा साहब द्वारा दिये गये संवैधानिक अधिकार पर दो शब्द भी नहीं बोले।
आज उप्र में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त होने के बाद किसी भी विभाग में उच्च पदों पर दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व लगभग नगण्य सा हो गया है। इस पर उप्र सरकार को कोई चिन्ता नहीं है। पब्लिक सेक्टर से जुड़े हुए बिजली, कृषि, सिंचाई व लोक निर्माण विभाग जहां पर पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था के समय कुछ पदों पर प्रतिनिधित्व दिखता था अब वह नगण्य हो गया है। संघर्ष समिति द्वारा जारी आंकड़े स्थिति का स्वतः खुलासा कर देंगे।
विभाग का नाम पदनाम कुल स्वीकृत पद अनु/जनजाति का प्रतिनिधित्व
बिजली निदेशक/ प्रबन्ध निदेशक 43 शून्य
बिजली मुख्य अभियन्ता स्तर-1/2 116 03
कृषि निदेशक 05 शून्य
कृषि अपर निदेशक 10 01
लोक निर्माण प्रमुख अभियन्ता/मुख्य अभि. 35 शून्य
सिंचाई प्रमुख अभि0/मुख्य अभि0(सिविल) 53 शून्य
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. राम शब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, अन्जनी कुमार, दिग्विजय सिंह, जितेन्द्र कुमार, प्रभू शंकर ने कहा कि यह तो उदाहरण मात्र है कमोवेश सभी विभागों में यही स्थिति है। केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा यदि लगभग 4 साल पहले पदोन्नति में लम्बित बिल पास कर दिया गया होता तो आज यह स्थिति न होती। उप्र सरकार भले ही दलित अधिकारियों को उच्च पदों पर होने की बात कह रही है, लेकिन आंकड़े जिस स्थिति का खुलासा कर रहे हैं वह काफी दयनीय है। पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त होने के कारण आज दलित कार्मिक पूरी तरह हाशिये पर चले गये हैं और उनका प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है।







