मुंबई, 19 अप्रैल। भोजपुरी फिल्म ‘सनकी दरोगा’ फिल्म की शूटिंग कर रहे अभिनेता रवि किशन ने कठुआ और उन्नाव रेप मामले पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को कठोर दंड दिया जाना चाहिए। तभी ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि रेप के मुकदमे फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए जाने चाहिए, ताकि कम समय में न्याय दिया जा सके।
जब तक लोगों को मौत का भय नहीं होगा, तब तक रेप की घटनाएं नहीं रुकेंगी। रवि किशन भोजपुरी फिल्म सनकी दरोगा की शूटिंग के लिए इन दिनों शहर में हैं। दिलीप गुलाटी निर्देशित इस फिल्म में रवि किशन के अलावा अंजना सिंह, मनोज टाइगर, दिनेश तिवारी सहित यूपी के कई कलाकार हैं। फिल्म लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव और बनारस में शूट की जाएगी।
उन्होंने बताया कि फिल्म में मैं ‘सनकी दारोगा’ के रूप में नजर आऊंगा। इसका नाम ही कमाल का है। फिल्म की पटकथा और संवाद बेहद अच्छे हैं। मुझे अपनी इस फिल्म से काफी उम्मीदें हैं। मेरे लिए कोई भी फिल्म छोटी या बड़ी नहीं होती है। कल से मैंने फिल्म की शूटिंग शुरू की है। मुझे उम्मीद है कि फिल्म हिट होगी। जहां तक बात दक्षिण और भोजपुरी इंडस्ट्री में तुलना की है तो यह सही नहीं है। दोनों का अपना अलग महत्व है। दोनों की ऑडियंस अलग हैं। उनका टेस्ट अलग है। जाहिर सी बात है कि दोनों इंडस्ट्री की फिल्में भी अलग तरीके से ही बनेंगी। मुझे भोजपुरी इंडस्ट्री ने बनाया है, जिसकी बदौलत दूसरी फिल्म इंडस्ट्री में मुझे काम मिल रहा है। वैसे अभी मेरा पूरा फोकस ‘सनकी दारोगा’ पर है।
कठुआ और उन्नाव रेपकांड पर प्रतिक्रिया करते हुए भोजपुरी और हिंदी फिल्मों में यादगार किरदार निभा चुके रवि कहते हैं कि मेरी भी बेटियां हैं। ऐसी खबरें जब पढ़ता या सुनता हूं तो उन्हीं का चेहरा आखों के सामने आ जाता है। मुझे लगता है कि हर इनसान को इस तरह की घटना को अपने परिवार से जोड़कर देखना चाहिए।
क्यों लोग दरिंदे बन रहे हैं? जो शारीरिक रूप से कमजोर है, जिसे ईश्वर ने जननी बनाया है, उसके साथ ऐसी हैवानियत कैसे कोई कर सकता है। ऐसे लोगों को तभी रोका जा सकेगा, जब उनमें मौत का भय होगा। रेप का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलना चाहिए। एक कोर्ट में केस हो, ताकि अपील करने की गुंजाइश न रहे। इस फास्ट ट्रैक कोर्ट से ही उन्हें सजा-ए-मौत मिल जानी चाहिए।
रवि ने कहा कि इस समय हर पार्टी की एक आवाज होनी चाहिए। राजनीति अलग है और बेटियों का सम्मान अलग है। यह सम्मान सबसे ऊपर होना चाहिए। अपने घर की बेटियों की तरह हर बेटी के लिए एकसाथ आवाज उठानी होगी। जितनी भी डिबेट हों, अनशन हों हर जगह सबकी एक आवाज होनी चाहिए कि ऐसे रेपिस्ट को फांसी की सजा हो।
मैंने कहीं पढ़ा कि एक दोषी ऐसा था, जिसे 12 बार इसी जुर्म के लिए पकड़ा गया था। वह बार-बार ऐसी हिम्मत इसीलिए कर रहा था क्योंकि उसे डर नहीं था। एक साथ जब 10 से 12 लोगों को रेप के जुर्म में फांसी होगी, तब इस पर लगाम लगेगी। ऐसे मुजरिमों को ट्रायल का मौका भी नहीं देना चाहिए।







