- वास्तव में केन्द्र की मोदी सरकार दलित कार्मिकों की हितैषी है तो अविलम्ब संसद का विशेष सत्र बुलाकर पदोन्नति बिल पास करा उसे संविधान की 9वीं सूची में डाले सरकार
लखनऊ, 18 अप्रैल। पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल लोकसभा से पास कराने को लेकर लम्बे समय से संघर्षरत आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र की प्रान्तीय कार्य समिति की बैठक में केन्द्रीय मंत्री श्री राम बिलास पासवान द्वारा पदोन्नति बिल पर अध्यादेश लाने के बयान पर आरक्षण समर्थकों ने मोदी सरकार पर हमला बोला कहा 4 साल से सरकार की चुप्पी के चलते पूरे देश में लाखों दलित कार्मिकों का अपमान हुआ अब जब चुनाव नजदीक है तो दलितों को लुभाने के लिये फिर एक बार बयानबाजी शुरू कर दी गई।
संघर्षरत नेता विगत में पदोन्नति बिल के मुद्दे पर श्री राम बिलास पासवान से मिलकर पदोन्नति बिल अविलम्ब पास कराने की गुहार लगायी थी लेकिन पदोन्नति बिल आज भी लम्बित है, जो यह सिद्ध करता है कि केन्द्र की मोदी सरकार केवल पदोन्नति बिल को आगे कर एक बार फिर देश के लाखों दलित कार्मिकों को बेवकूफ बनाने की साजिश की जा रही है, जिसे प्रदेश का 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिक बहुत पहले समझ चुका है कि भाजपा की कथनी और करनी में बहुत अन्तर है। वास्तव में यदि सरकार दलित कार्मिकों की हितैषी है तो अविलम्ब संसद का विशेष सत्र बुलाकार पदोन्नति बिल पास कराकर उसे संविधान की 9वीं सूची में डाले।
आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति, उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार , रीना रजक, प्रेम चन्द्र, राधेश्याम, अशोक सोनकर, जितेन्द्र कुमार, श्रीनिवास, सुनील कनौजिया ने कहा कि यदि सरकार को अध्यादेश लाना ही था तो उस वक्त लाती जब प्रदेश के 2 लाख दलित कार्मिकों को पिछली सरकार में पदो/वरिष्ठता में रिवर्ट किया गया। संघर्ष समिति लगातार भाजपा के नेताओं व सांसदों से गुहार लगा रही है कि बाबा साहब द्वारा बनायी गयी संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार अविलम्ब केन्द्र की मोदी सरकार पदोन्नति में आरक्षण सम्बन्धी 117वां बिल अविलम्ब पास करें, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं।







