कर्ज नहीं चुकाने पर 99 साल की लीज पर दिया चीन को
नई दिल्ली, 20 अप्रैल। आठ साल पुराना हंबनटोटा पोर्ट चीन के ‘बेल्ट ऐंड रोड’ इनिशिएटिव में क्या गलत हो सकता है इसका बेहतरीन उदाहरण है। श्रीलंका ने हंबनटोटा बंदरगाह को विकसित करने के लिए भारी लोन लिया और लोन चुका न पाने पर उसने यह अहम पोर्ट चीन को 99 साल की लीज पर दे दिया। एक खबर के मुताबिक, हंबनटोटा उदाहरण है कि ड्रैगन के ‘बेल्ट ऐंड रोड’ इनिशिएटिव, जिसमें वह 500 बिलियन डॉलर निवेश करने का प्लान कर रहे हैं वह चीन का प्रभाव और सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंट के शिपिंग ऐनालिस्ट राहुल कपूर ने बताया कि हंबनटोटा का खराब प्रदर्शन यह दिखाता है कि यह केवल चीन के रणनीतिक फायदों को पूरा करने के लिए ही है। उन्होंने कहा कि इस पोर्ट पर ट्रैफिक बढ़ाने के लिए लाखों करोड़ का निवेश करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा, ‘हंबनटोटा उदाहरण है कि कैसे चीन समुद्र में अपना प्रभुत्व बढ़ाना चाहता है।’ हंबनटोटा अपने शुरुआती दिनों से ही विवादों में रहा है। श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने चीन से लोन लेकर अपने गृह जिले में इस प्रॉजेक्ट की शुरुआत की थी। श्रीलंका के पीएम रानिल विक्रमसिंघे ने बताया कि 1.1 बिलियन डॉलर की डेट-टु-इक्विटी स्वाप से लोन को बोझ कुछ कम हुआ था। सरकार के इस कदम से लोगों में नाराजगी भी देखी गई। हाल की दिनों की बात करें तो हंबनटोटा पोर्ट पर जहाज के नाम पर कुछ भी देखने को नहीं मिलता। सिंगापुर के किसी शिप से कुछ सामान अनलोड जरूर हो रहा था लेकिन उनकी शिकायत थी कि इसमें काफी समय लग रहा है।
इस पोर्ट में जान डालने की सरकार काफी कोशिशें कर रही है। हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभुत्व के कारण भारत और जापान की चिंताओं को दूर करने के लिए श्रीलंका ने अपनी दक्षिण नेवल कमांड को हंबनटोटा में रीलोकेट कर दिया था। श्रीलंका सरकार ने आश्वस्त किया था कि वह हंबनटोटा को मिलिट्री पोर्ट नहीं बनने देंगे। मुंबई के ऐनालिस्ट अमित भंडारी का कहना है, ‘श्रीलंका की सरकार का कहना है कि वह हंबनटोटा का मिलिट्री यूज नहीं होने देंगे, लेकिन यह बदल सकता है। 99 साल की लीज लंबा समय है।’ लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल जोन आसपास के इलाके में प्रस्तावित है जिससे किसानों को डर है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन खो देंगे।
52 साल के एक किसान धर्मसेना ने कहा, ‘सारा फायदा चीन को वापस चला जाएगा।’ चीन ने इस हफ्ते बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के सैन्य मकसदों पर हो रही अटकलबाजियों को नकारा था। चीन की सरकार ने कहा था कि यह प्रयास ‘खुला और पारदर्शी’ है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ ने कहा था, ‘वे लोग जो अटकले लगाते हैं, मुझे लगता है कि ऐसा करने के कोई कारण नहीं है।’







