तीर्थाटन के लिए विशेष महत्व रखता है हरिद्वार
हरिद्वार उत्तराखंड प्रदेश से निकल कर बहने वाली गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है। हरिद्वार में गंगा की प्रत्येक शाम को होने वाली आरती लोगोँ के दिलों में विशेष आस्था का महत्व रखती है। हमारे देश ही नही वल्कि विदेश से भी प्रत्येक दिन भक्तों का झुंड इस आरती में शामिल होकर अपने दिलो दिमाग को पाप दूषित मनोवृति से रहित करने की चाह में हजारो की संख्या में लोग गंगा के दर्शन करते है। हरिद्वार का हिन्दू धार्मिक मान्यताएं होने से यह तीर्थाटन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहा घूमने- फिरने एवं धार्मिक यात्राएं के साथ ही साथ धार्मिक कर्मकांडो के लिए अत्यंत सुंदर मंदिर बने हुए है। हरिद्वार में अनेको दर्शनीय स्थल है।
हरिद्वार में विशेष महत्व है इन स्थानों का-

हर की पौड़ी : डुबकी लगाकर दूर होते हैं पाप
यहां पर बने गंगा घाटों में हर की पौड़ी सबसे अधिक प्रसिद्ध घाट है। सम्पूर्ण देश भर में सबसे प्रसिद्ध गंगा की आरती इसी ब्रहमकुंड में प्रत्येक संध्या को होती है। गंगा के किनारे इसी जगह पर कुम्भ मेला एवं अर्ध कुम्भ मेला आयोजित की जाती है।
विष्णु घाट मंदिर:
ऐसी मान्यता है कि हरिद्वार के इस स्थान में भगवान विष्णु ने स्नान किया था उसी समय से इसका नाम विष्णु घाट पड़ गया। हरिद्वार के घाटो पर आने वाले श्रद्धालु इस घाट पर आकर भी स्नान अवश्य करते है।
चंडी देवी मंदिर :
यह मंदिर माँ काली का है जो की हरिद्वार के मुख्य स्थान के पास से 3.5 km की दुरी पर नील पर्वत पर स्थापित किया गया है। लोगो द्वारा ऐसा कहा जाता है की आदि शंकराचार्य ने यहा पर इस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा किया था।ऊंचे स्थान पहाड़ पर मंदिर के होने की वजह भक्तगण यहां पर उड़नखटोला द्वारा मंदिर तक जाते है।

मनसा देवी का मंदिर: मनसा देवी करती है भक्तों की मुराद पूरी
यह मंदिर मुख्य हरिद्वार से 4.5 km की दुरी पर बिल्वा नामक पर्वत पर स्थापित है। यहा पर पहुंचे के लिए उड़नखटोला का सहारा लिया जाता है। लोगों के मध्य ऐसी मान्यता है कि शक्तिपीठ के रूप में माँ मनसादेवी अपने भक्तो के दुःखो का निवारण करती है।
शांतिकुंज हरिद्वार:
हरिद्वार में आने वाले भक्तगणों को इस जगह पर आकर ही शांति एवं धर्म के संबंध में सूक्ष्म रूप से जानकारी करते है। यह स्थान गायत्री परिवार के ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। आचार्य श्री राम शर्मा जी के द्वारा सन 1971 में इसकी स्थापना किया गया था ।
दक्ष महादेव मंदिर :
यह मंदिर भगवान शिव का है जो हरिद्वार से 5 किमी की दुरी पर कनखल पर स्थित है। दक्ष ब्रह्मा जी के पुत्र उसके पश्यचात शिवजी के ससुर बने।
भारत माता का मंदिर :
हरिद्वार के पास मोतीचूर नामक जगह पर भारत माता का यह मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर पूरे आठ मंजिलों का है। यहा पर भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के विषय में विस्तार से बताया गया है। पहली मंजिल में ही भारत माता की मूर्ति की स्थापना की गयी है।
सप्तऋषि आश्रम :
यहा पर किसी समय सप्त ऋषि अर्थात सात ऋषियों द्वारा एक साथ तप साधना किया गया था जिस बजह से इस आश्रम का नाम सप्तऋषि आश्रम पड़ा। यहा पर एक रुद्राक्ष का पेड़ भी है ऐसी मान्यता है कि इसके दर्शन करना अति शुभ माना जाता है। यहा पर एक 150 किलो का शिवलिंग स्थापित है जिसके दर्शनार्थ भक्तों की भीड़ महाशिवरात्रि के दिन जुटती है।
दूधाधारी महादेव मंदिर :
दूध के रंग सादर्श भगवान शिव मंदिर के साथ साथ राम दरबार भी स्थापित है। यहा भगवान शिव शंकर को बर्फानी बाबा के रूप में दर्शन करते है।
वैष्णोदेवी मंदिर :
जम्मू कश्मीर में जिस तरह की माँ वैष्णो देवी का मंदिर स्थापित है उसी आधार पर इस मंदिर का यहा निर्माण हुआ है । गुफा के माध्यम से माँ वैष्णो के दर्शन करना भक्तों को रोमांचित कर देता है।







