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    लखनऊ का चमत्कारी अक्षय वट: शांति और आध्यात्मिक सुकून चाहिए तो यहाँ आइए

    ShagunBy ShagunMarch 22, 2026Updated:March 22, 2026 Indian tourism spots No Comments8 Mins Read
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    Lucknow's Miraculous Akshay Vat: Come Here for Peace and Spiritual Serenity
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    मेरी यादगार यात्रा व्लॉग : नीतू सिंह

    नमस्ते दोस्तों! स्वागत है आपका मेरे नीतू व्लॉग में। आज मैं आपको लखनऊ के एक ऐसे रहस्यमयी कोने ले चलती हूं, जहां प्रकृति और आस्था का अनोखा संगम है। लखनऊ के कि बख्शी का तालाब इलाके में बसा हरिवंश बाबा अक्षय वट आश्रम – एक 250 साल पुराना विशाल बरगद वृक्ष, जो ढाई एकड़ में फैला हुआ है। इसकी जड़ें इतनी घनी हैं कि अंदर घुसते ही लगता है, आप किसी जादुई भूलभुलैया में खो गए। आज मैं आपको इसकी पूरी कहानी सुनाती हूं, साथ ही एक रोचक किस्सा भी जोड़ती हूं जो मेरी जिंदगी बदल गया। चलिए, शुरू करते हैं इस धार्मिक साहसिक यात्रा की ऐतिहासिक कहानी पगडण्डी की ।

    दिन की शुरुआत: सफर की तैयारी

    यात्रा की शुऊआत अचानक से हुई, इस दिन हमारे देवर जी ने बताया कि आज एक ऐतिहासिक यात्रा पर घूमने चलते हैं तो वह सपरिवार दिन में हमारे घर आ गए चूँकि स्कूल में सभी बच्चों के एग्जाम ख़त्म हो गए थे तो कोई दिक्कत नहीं थी और फिर हमारा परिवार और उनका परिवार साथ हो लिया हम सब एक ही गाड़ी में थे और चल पड़ें –Lucknow's Miraculous Akshay Vat: Come Here for Peace and Spiritual Serenity

    दिन में हम सभी लखनऊ के कुड़िया घाट से होकर प्रेरणा स्थल को पारकर आगे निकले। घड़ी में 2:30 बज रहे थे, और गोमती नदी का खूबसूरत नज़ारा दिख रहा था। बख्शी का तालाब तक का रास्ता करीब 25 किलोमीटर का है – NH-30 से होते हुए मॉल ब्लॉक के मंझी गांव की ओर। रास्ते में चंद्रिका देवी मंदिर से सिर्फ ढाई किलोमीटर दूर। ग्रामीण सड़कों पर धूल उड़ रही थी, लेकिन उत्साह इतना कि थकान महसूस ही न हुई। हवा में एक अजीब सी शांति थी, जैसे कोई अदृश्य शक्ति हमें बुला रही हो। फिलहाल बच्चे बहुत खुश थे। बच्चों ने रास्ते में रूककर पेड़ों पर चढ़कर खूब एन्जॉय किया। रास्ते में खेतों को देखते हुए बड़ा आनंद आया। यहाँ ढेर सारे बंदर दिखें। बच्चों ने बंदरों को खूब देखा ! गावं के टेढ़े मेढें रास्तों से होकर गुजरते हुए हम सब पहुंचे उस जगह जहा खूब दुल्हन की तरह दुकाने सजी थी। और बड़ा सुकून था। बच्चों ने अपने लिए खूब खिलोने ख़रीदे और हमने भी अपने लिए कई यूज़फुल समाने खरीदी ! फिर हम सब बढे मंदिर दर्शन की ओर यहाँ के निवासियों ने बताया कि यहाँ का आध्यात्मिक महत्व बहुत खूब है यहाँ जो भी मुरादें मांगता है पूरी जरूर होती है। फिर हम सब चल पड़े मंदिर को ओर –Lucknow's Miraculous Akshay Vat: Come Here for Peace and Spiritual Serenity

    आश्रम का स्वागत: विशाल वृक्ष का पहला दर्शन

    प्रसाद लेने के बाद हम सब ने आश्रम के गेट से अंदर प्रवेश किया आश्रम द्वार के समीप ही भूत नाथ बाबा के पहले दर्शन हुए जो देखने में बड़ा ही डरावना सा प्रतीत हुआ लेकिन जैसे ही धीरे धीरे आगे बढे डर गायब होता गया। ऐसा लगा जैसे कोई पॉजिटिव आध्यात्मिक शक्ति हमें बुला रही है और जैसे ही थोड़ा आगे बढे भगवान् श्री राम का मंदिर दिखा -जो सभी के दिल को बड़ा सुकून दे रहा था। दर्शन के बाद हम सभी ने मंदिर की परिक्रमा की , जो बड़ा ही आनंदमय था।

    Lucknow's Miraculous Akshay Vat: Come Here for Peace and Spiritual Serenity
    लखनऊ का चमत्कारी अक्षय वट: शांति और आध्यात्मिक सुकून चाहिए तो यहाँ आइए

    बता दें कि आश्रम के गेट से अंदर घुसते ही नजर पड़ी उस चमत्कारी अक्षय वट पर। जो एक विशाल बरगद का पेड़ था। लोग बताते हैं कि ढाई एकड़ में फैला, यह अक्षय वट जहाँ इसकी हवाई जड़ें जमीन को छूकर नए-नए स्तंभ व नए पेड़ बना रहीं हैं। ऊपर शाखाएं इतनी घनीं कि सूरज की रोशनी भी मुश्किल से छनकर आती है। अंदर का रास्ता घुमावदार है, जैसे कोई प्राकृतिक किला। हमने परिक्रमा शुरू की – लगभग बीस मिनट लग गए पूरे चक्कर में। पुजारी जी मिले, जिन्होंने बताया कि इसकी जड़ों का कोई ओर-छोर नहीं। “यह अमर वृक्ष है,” उन्होंने कहा, यह “हरिवंश बाबा की तपस्या से फूटा।” कैमरे से क्लोज-अप शॉट्स लिए – जड़ों पर उगी लताएं, छोटे-छोटे मंदिर, और भक्तों की भीड़। वाकई, प्रकृति का खूबसूरत आश्चर्य लग रहा था जैसे। आगे चलकर ठंडी छाया में बैठे तो लगा, सारी दुनिया की थकान उतर गई। सुकून और शांति बहुत थी। मन बार बार यहाँ आने का दिल कर रहा था। बहुत अच्छा एक्सप्रिएंस रहा यहाँ हम सब का।

    क्या है हरिवंश बाबा की प्रेरणादायक कथा-

    अब सुनिए इस वृक्ष की आत्मा की कहानी। यहाँ के लोग बताते हैं कि करीब 300 साल पहले मंझी गांव में हरिवंश नाम का एक किशोर रहता था। अनाथ होने पर वह चंद्रिका देवी मां का परम भक्त बन गया। रोज मंदिर जाता, फूल-चढ़ावा चढ़ाता। बुढ़ापे में पैरों ने साथ छोड़ दिया, फिर भी हार न मानी। मान्यता है कि मां ने स्वप्न में दर्शन दिए – “यहीं तपस्या करो, मैं तेरे साथ हूं।” बाबा ने इसी जगह घोर तपस्या की, बिना अन्न-जल के। आखिरकार जीवित समाधि ले ली। उसी समाधि स्थल से यह अक्षय वट निकला। पुजारी ने कहा, “बाबा आज भी जिंदा हैं, इस वृक्ष में विराजमान।” हर मंगलवार को विशेष पूजा होती है, यहाँ वट सावित्री व्रत पर तो मेला लगता है। यज्ञ, भजन, कीर्तन – पूरा आश्रम आस्था से गूंज उठता है। तो बता दें कि यह कथा सुनकर मन में श्रद्धा जागी, लगा कि सच्ची भक्ति से क्या-क्या संभव है।

    चमत्कारों की धरती है आस्था के अनगिनत प्रमाण मौजूद हैं यहाँ –

    बता दें कि यह वृक्ष सिर्फ पेड़ नहीं, चमत्कारों का खजाना है। स्थानीय मान्यता है कि चंद्रिका देवी मां के दर्शन बिना अक्षय वट की परिक्रमा अधूरी। भक्त यहां मन्नत मांगते हैं – संतान प्राप्ति, नौकरी, स्वास्थ्य। पूरी होने पर छोटे मंदिर बनवाते हैं – शिवजी, हनुमान, दुर्गा के। एक बुजुर्ग ने बताया, “मेरी बेटी को 10 साल बाद बच्चा हुआ, यहीं की कृपा।” वृक्ष को नुकसान पहुंचाने पर 501 रुपये का जुर्माना – आस्था की रक्षा। वट सावित्री पर महिलाएं व्रत रखती हैं, यज्ञ में आहुति देती हैं। यहाँ के लोग बताते हैं कि, एक परिवार ने नया मंदिर बनवाया था – खुशी से नाच रहे थे।

    Lucknow's Miraculous Akshay Vat: Come Here for Peace and Spiritual Serenity
    लखनऊ का चमत्कारी अक्षय वट: शांति और आध्यात्मिक सुकून चाहिए तो यहाँ आइए

    अगर वैज्ञानिक नजर से देखें तो बरगद की हवाई जड़ें स्ट्रैंगलर फिग की तरह काम करती हैं, लेकिन यहां की उम्र और फैलाव चमत्कारिक ही है। पर्यावरण के लिए ऑक्सीजन का खजाना, पर कचरा-फेक प्लास्टिक की समस्या है।

    रोचक किस्सा: मेरी जिंदगी बदलने वाली घटना

    अब एक ऐसा किस्सा जो कभी न भूले – लोग बताते हैं कि एक घटना है जो एक श्रद्धालु यात्री राहुल को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। लोग घबरा गए – नजदीकी अस्पताल दूर था। आश्रम में पुजारी जी ने कहा, “बाबा पर भरोसा रखो।” उन्होंने वृक्ष की जड़ से निकले जल को स्पर्श कराया, और एक मंत्र पढ़ा। 15 मिनट में राहुल को आराम मिल गया। डॉक्टर ने बाद में चेक किया – हार्ट अटैक का खतरा टल गया। राहुल ने वहीं मन्नत मानी, लोग बताते हैं कि आज नौकरी लग चुकी है।

    दोस्तों, यह सिर्फ संयोग न था – आस्था की शक्ति थी। अक्षय वट सिर्फ वृक्ष नहीं, जीवंत ऊर्जा हैं।

    आसपास के आकर्षण: पूरा दिन बिताने लायक

    कहते हैं कि आश्रम घूमने के बाद चंद्रिका देवी मंदिर जरूर जाएं। तांत्रिक सिद्धपीठ, जहां रातों-रात साधनाएं होती हैं। बख्शी का तालाब पक्षियों का पैराडाइज है – क्रेन, बतख जैसे पंछी उड़ते दिखें। आप यहाँ ऊंट सवारी लें, वीडियो बनाएं। प्रसाद की दुकानों पर फल, फूल, लड्डू मिलेंगे। लोकल चाय-पकौड़े खाइए – स्वाद लाजवाब। बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग यहां हुई है, फिल्मी फील आती है। अगर फैमिली के साथ हैं तो पिकनिक स्पॉट पर रुकें। अगर पर्यटन विभाग इसे प्रमोट करे तो बड़ा टूरिस्ट हब बनेगा। हमने शाम का नाश्ता वहीं किया। शाम तक रुके, सूर्यास्त देखा – जादुई दृश्य।
    Lucknow's Miraculous Akshay Vat: Come Here for Peace and Spiritual Serenity

    वैज्ञानिक और पर्यावरणीय महत्व

    बरगद को banyan tree कहते हैं – इसकी जड़ें हवा में लटकती हैं, जमीन छूकर नए पेड़ बनाती हैं। 250 साल में यह इतना फैल गया, ऑक्सीजन और छाया का स्रोत। लेकिन जलवायु परिवर्तन से खतरा – सूखा पड़ रहा। स्थानीय प्रयासरत हैं, लेकिन सरकारी मदद चाहिए। वैज्ञानिकों का मानना है, ऐसे वृक्ष जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण। पक्षी, कीड़े-मकोड़े यहां बसते हैं। इसे संरक्षित घोषित करना चाहिए।

    मेरी व्यक्तिगत अनुभूति और सलाह

    यह यात्रा मेरे लिए जीवन का टर्निंग पॉइंट थी। अंदर ध्यान किया – शांति ऐसी कि शहर का शोर भूल गया। परिवार के साथ गपशप, भक्तों की कहानियां सुनी। फोटोशूट किया। शाम को लौटे, लेकिन मन वहीं छूट गया। तो लखनऊ आने वाले miss न करें – फैमिली, सोलो, कपल सबके लिए।

    टिप्स: सुबह जल्दी आएं, पानी साथ रखें, आरामदायक जूते पहनें। मोबाइल चार्ज रखें शूटिंग के लिए।

    अंत में क्यों जरूरी है यह जगह

    दोस्तों, अक्षय वट सिर्फ पर्यटन नहीं, आत्मिक यात्रा है। प्रकृति, इतिहास, आस्था का मेल। मेरे किस्से से प्रेरित होकर जाएं। पर्यावरण बचाएं, आस्था निभाएं। तो कैसा लगा नीतू व्लॉग ? लाइक, कमेंट, शेयर करें। सब्सक्राइब करना भूलना मत।

    जय हरिवंश बाबा, जय अक्षय वट! जय मां चंद्रिका!

    Shagun

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