- …और तय होगी उनकी जवाबदेही – ऊर्जा मंत्री
- उपभोक्ता परिषद ने कहा कन्सल्टेंटों के कार्यों की हो समीक्षा उनकी रिपोर्ट के बाद भी लगातार बिजली कम्पनियाॅं घाटे में क्यों?
- पावर फार आल, उदय, सौभाग्या, टैरिफ, आईटी विद्युतीकरण स्कीमों में रखे गये हैं 100 करोड से ज्यादा रखे गये हैं निजी व सरकारी कन्सल्टेंट
लखनऊ, 11 मई। पावर कारपोरेशन सहित प्रदेश की बिजली कम्पनियों में पावर फार आल, उदय स्कीम, सौभाग्या स्कीम, टैरिफ स्कीम, आईटी सेल, विद्युतीकरण सहित अन्य योजनाओं में रखे गये 100 करोड से ज्यादा के निजी/सरकारी कंसल्टेन्टों के मामले में आज उस समय नया मोड आ गया, जब उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से अपराहन 1 बजे शक्ति भवन में मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा और लम्बी वार्ता की।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ऊर्जा मंत्री को सौंपे गये ज्ञापन में यह मुददा उठाया कि ऊर्जा क्षेत्र में कन्सल्टेन्टों का मकडजाल फैल गया है इनकी जवाबदेही व इनके कार्यों की गहन समीक्षा करायी जाये कि इससे बिजली विभाग को क्या लाभ हो रहा है। वर्तमान में बिजली कम्पनियाॅं 70 से 80 हजार करोड के घाटे में हैं और वहीं कन्सल्टेन्ट रोज अपनी रिपोर्ट देते हैं फिर भी सुधार परिलिक्षित नही हो रहा है और उसका खामियाजा प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में बढोत्तरी के रूप में सामने आ रहा है।
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि बिजली विभाग में रखे गये कन्सल्टेंटों के कार्यों की समीक्षा होगी और उनकी जवाबदेही तय करने के लिये उचित कदम उठाया जायेगा। सरकार उपभेक्ताओं को अच्छी गुण्वत्ता की बिजली सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास जारी रखेंगे।
कन्सल्टेंटों द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में समय- समय पर क्या कार्य किया गया?
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने यह मुददा उठाया कि सभी कन्सल्टेंटों में रखे गये तकनीकी/वित्तीय विशेषज्ञों की पूरी छानबीन करायी जाये उनका पुराना बैकग्राउन्ड देखा जाये कि उनके द्वारा देश के ऊर्जा क्षेत्र में समय- समय पर क्या कार्य किया गया? सबसे दुर्भाग्य की बात यह है कि करोडों रूपये में रखे गये कन्सल्टेन्ट बिजली विभाग से ही आॅंकडे लेकर उसे रिपोर्ट में कनवर्ट कर पेश कर देते हैं और वाहवाही लूटते हैं। कई कन्सल्टेंट ऐसे हैं जो बिना हस्ताक्षरित रिपोर्ट देते हैं। कन्सल्टेन्टों की रिपोर्ट पर परिणाम न मिलने पर उनके खिलाफ कार्यवाही व पेनाल्टी का क्या प्राविधान है?
इसके साथ ही उपभोक्ता परिषद ने एक गंभीर मुददा यह भी उठाया कि भारत सरकार में ऊर्जा क्षेत्र व पीएफसी की अनेकों सब्सिडरी कम्पनियाॅं सरकारी कन्सल्टेंट कम्पनी के नाम पर ऊर्जा क्षेत्र में करोडों का काम बिना टेंडर के ले लेती हैं और उसे सबलेट कर निजी कन्सल्टेंट कम्पनियों को कम दरों पर दे देती है जो संवैधानिक नही है साथ ही केन्द्रीय वित्त पोषित योजनाओं में कार्य लेना स्वतः कनफिलिट आफ इन्ट्रेस्ट की श्रेणी में आता है। उपभोक्ता परिषद ने मा0 मंत्री जी के सामने यह भी मुददा उठाया कि 1959 के बाद विगत वर्षों में रखे गये कन्सल्टेंटों की अब तक की सभी रिपोर्ट पर बिजली विभाग को क्या लाभ मिला उसकी भी समीक्षा करायी जायेे।
उपभोक्ता परिषद ने यह भी मुददा उठाया कि एचसीएल बिलिंग एजेन्सी द्वारा स्वतः उसके अनुबन्ध में अनेकों स्वतः जनरेटेड बिलिंग रिपोर्ट निकलती है। उसकी समीक्षा क्यों नही होती? अनेकों कार्य उसके आधार पर भी दूसरी कन्सल्टेंट कम्पनियों को दिये गये हैं। अनेकों कन्सल्टेंट कम्पनियाॅं जो उप्र में करोडों में काम ले रही हैं वही दूसरे राज्यों में सस्ती दरों पर कार्य कर रही हैं जो अपने आप मे चिन्ता का विषय है।






