उपभोक्ता परिषद ने उठाया सवाल कहा: भारत सरकार की गाइड लाइन के तहत लगाए जाए स्मार्ट मीटर
लखनऊ, 13 मई। उत्तर प्रदेश में लगने वाले 40 लाख स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन प्रबन्धन से यह माॅग उठायी है कि मीटरों की उच्च गुणवत्ता व पूरी योजना में पारदर्शिता बनाये रखने के लिये भारत सरकार की गाइड लाइन का शत प्रतिशत पालन कराया जाय। जहाॅ प्रबन्धन लखनऊ सहित कुछ शहरो में स्मार्ट मीटर लगाने के लिये इन्डेक्सिंग चालू कर दी है, वहीं शायद पावर कारपोरेशन को यह नहीं पता है कि सबसे पहले भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय व केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की गाइड लाइन के तहत स्मार्ट मीटर के पूरे रोल आउट प्लान को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग से अनुमोदित कराना होगा।
बिना आयोग द्वारा अनुमोदित प्लान के पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है। और यदि उप्र के लिये गाइड लाइन में कोई बदलाव हुआ है तो उसका खुलासा होना जरूरी है। उपभोक्ता परिषद स्मार्ट मीटर लगाने की पूरी पारदर्शी प्रक्रिया का हमेशा स्वागत करेगा लेकिन कानूनी प्रक्रिया का पालन होना आवश्यक है जिससे उपभोक्ताओं में बना रहे विश्वास क्योंकि यह पूरी प्रक्रिया राजस्व माडल के रूप में कार्य करेगी।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि वर्ष 2016 में जब स्मार्ट मीटर के बारे में भारत सरकार ने योजना बनाई उसके बाद पारदर्शिता कायम करने के लिये भारत सरकार ऊर्जा मंत्रालय द्वारा फोरम आफ रेगुलेटर एवं राज्यों के प्रमुख सचिवों को इस आशय का निर्देश जारी किया गया था कि स्मार्ट मीटर लगाने की पूरी प्रक्रिया पर टैरिफ पालिसी के तहत एक रोल आउट प्लान बनाना होगा और उसे राज्यों के नियामक आयोगों द्वारा अनुमोदित कराना होगा और साथ ही बिजली कम्पनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्मार्ट मीटर का बीआईएस सर्टिफिकेट आईएस 16444 के तहत मीटर निर्माता कम्पनियों को लेना अनिवार्य होगा।
भारत सरकार द्वारा बनायी गयी गाइड लाइन में यह भी अनिवार्य किया गया था कि पहले फेस में उन उपभोक्ताओं के परिसर पर स्मार्ट मीटर स्थापित किया जाय, जिनका प्रतिमाह उपभोग 500 यूनिट से ज्यादा हो और दूसरे चरण में उन उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर लगाये जाये जिनका उपभोग प्रतिमाह 200 यूनिट से ज्यादा हो। यह बात अलग है कि राज्य सरकारें इस पर अपना अलग मत रख सकती है लेकिन उस पर भारत सरकार से अनुमति लेना जरूरी होगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन को सबसे पहले एडवांस मीटरिंग इन्फाटेक्चर के तहत स्मार्ट मीटर लगाने हेतु एक रोल आउट प्लान बनाना चाहिये और उस पर नियामक आयोग की अनुमति के बाद आगे की प्रक्रिया चालू करना चाहिये। लेकिन अभी तक इस पूरी प्रक्रिया में नियामक आयोग से अनुमोदन न लिया जाना अपने आप में सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।







