डॉ दिलीप अग्निहोत्री
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बाल्टी प्रकरण भी चर्चा में था। ऐसे माहौल में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने की इच्छा व्यक्त करेंगे, लोग चौक ही जायेंगे। यही हुआ, अपने अपने ढंग से राहुल के बयान पर टिप्पणी आने लगी। चुनाव प्रचार का मौका था। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कैसे चूकते।उन्होंने उदाहरण के माध्यम से अपनी बात रखी थी। कहा कि जैसे नल से पानी लेने के लिए लोग बाल्टी रखते है, तभी कोई दबंग लाइन तोड़कर आगे अपनी बाल्टी रख देता है। मोदी का यह इशारा काफी था। मतलब था कि विपक्ष में प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वालों की पहले से लाइन लगी है। ऐसे में राहुल की दावेदारी लाइन में अपनी बाल्टी रखने जैसी है। बताया जाता है कि यूपीए के समय ही सोनिया गांधी अपने वास्तविक उत्तराधिकारी राहुल को प्रधानमंत्री बनाना चाहती थी। लेकिन तब राहुल का कहना था कि जब कांग्रेस अपनी दम पर बहुमत प्राप्त करेगी तभी वह प्रधानमंत्री बनेंगे। सोनिया गांधी की इच्छा को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी कुर्सी छोड़ने को तैयार थे। उनका कहना था कि राहुल बाबा एक बार कहें तो मै यह पद उनके लिए खाली कर दूंगा। यह उनका कोई अहसान नहीं होता, बल्कि राहुल चाहते तो उन्हें ऐसा करना ही पड़ता। लेकिन तब राहुल जिम्मेदारी संभालने से बचते रहे। जब कांग्रेस अपनी सबसे कमजोर दशा में है, राहुल ने अपने को भावी प्रधानमंत्री की लाइन में स्वेच्छा से शामिल कर लिया है।
राहुल का यह मंसूबा अनेक लोगों के लिए मजाक का विषय हो सकता है। लेकिन कांग्रेस पार्टी को इसे गंभीरता से लेना चाहिए था। उसे अभी से राहुल की दावेदारी को हकीकत में बदलने के प्रयास में जुट जाना चाहिए। लेकिन फिलहाल इसका उल्टा हो रहा है। कांग्रेस के नेता प्रांतीय नेताओं को बढ़ावा या प्रोत्साहन देने में लगे है। इसका सबसे बड़ा उदाहारण कर्नाटक है। जदयू प्रमुख देवगौड़ा ने अपने मन को समझा लिया था कि वह अब कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकेंगे। लेकिन भला हो कांग्रेस का उसने प्रधानमंत्री की लाइन में राहुल के साथ देवगौड़ा को भी लगा दिया है।
सैंतीस सीट जीत कर वह तीसरे पायदान पर थे। बहुत संभव था कि किसी एक दल के साथ मिलकर उनकी पार्टी सरकार में शामिल हो जाती। यहां तक रहता तो गनीमत थी। देवगौड़ा और उनकी पार्टी एक सीमा से ऊपर नहीं जाती। लेकिन दोगुनी से ज्यादा सीट लेकर कांग्रेस उनके पीछे दौड़ गई। कहा बस आप सरकार बनाने के लिए राजी हो जाओ, हमको तुम्हारी सभी शर्ते मंजूर है । कांग्रेस के इस समर्पण ने ही देवगौड़ा को लाइन में बाल्टी रखने को प्रेरित किया। बताया जाता है कि देवगौड़ा अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाकर केंद्रीय राजनीति में सक्रिय होने की योजना तैयार करने लगे थे। इस तरह कांग्रेस ने राहुल के मुकाबले देवगौड़ा को आगे पहुंचा दिया है।







