Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 538 जिनके टूटे दांत है, वे हैं खड़े उदास। चरने वाले चर रहें, लोकतंत्र की घास।। लोकतंत्र की घास, चरे पर नहीं अघाते, लेते नहीं डकार, और मुँह नहीं उठाते, पीट रहे माथा, कोसते दिन गिन- गिन के। लोकतंत्र की घास, नहीं किस्मत में जिनके।। -सीएम त्रिपाठी
‘सेल्स’ अब सिर्फ बिजनेस नहीं, जीवन का जरूरी कौशल है! मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की नितीन ढबू की किताब का विमोचन