- मोदी सरकार एक तरफ हर घर बिजली देने हेतु अभियान चला रही है दूसरी तरफ नये कनेक्शन की दरों में शामिल विभिन्न सेवाओं पर जीएसटी लागू करने से नया कनेक्शन हुआ महंगा सरकार की कैसी नीति?
लखनऊ, 05 जून। बिजली की अनेकों सेवाओं प्रोसेसिंग फीस, सिस्टम लोडिंग चार्ज, मीटर कास्ट सहित अनेकों सेवाओं में 18 प्रतिशत लागू करने का आदेश पावर कारपोरेशन व बिजली कम्पनियों के प्रबन्ध निदेशकों द्वारा जारी करने से पूरे प्रदेश में नया कनेक्शन लेने वाले विद्युत उपभोक्ताओं को अब अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी।
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि पूरे प्रदेश में फ्री कनेक्शन को छोड़कर सभी नया कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन फीस में अब जीएसटी के चलते बढ़ोत्तरी हो गयी है। कितने दुर्भाग्य की बात है कि एक तरफ केन्द्र की मोदी सरकार हर घर को बिजली देने के लिये अभियान चला रही है और दूसरी तरफ जीएसटी के चलते कनेक्शन की दरों में इजाफाा हो रहा है जो अपने आप में चिन्ता का विषय है। पावर कारपोरेशन रिगुलेटरी विंग द्वारा टैरिफ आदेश के मिसलेनियस चार्ज पर 23 मई, 2018 को गुपचुप तरीके से 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने का आदेश सभी बिजली कम्पनियों व आईटी सेल को भेज दिया गया है, जबकि नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश के किसी भी संलग्नक पर जिस पर अधिसूचना जारी है, उसमें कोई भी बदलाव के लिये आयोग से अनुमति लेनी चाहिए थी। उपभोक्त परिषद केन्द्र व उप्र सरकार से बिजली की अनेकों सेवाओं पर जीएसटी को अविलम्ब समाप्त कराने की मांग उठाता है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जिस प्रकार से नया कनेक्शन के मामले में आनन फानन में जीएसटी लागू की गयी वह अपने आप में चिन्ता का विषय है। प्रदेश का विद्युत उपभोक्ता 5 प्रतिशत से लेकर 20 प्रतिशत तक रेगुलेटरी सरचार्ज के रूप में एक टैक्स अदा कर रहा है। फिर जीएसटी वसूल करने का क्या मतलब है? प्रोसेसिंग फीस, सिस्टम लोडिंग चार्ज, मीटर कास्ट, नये कनेक्शन की दरों का मुख्य आधार है। उसमें 18 प्रतिशत जीएसटी लागू करने से नये कनेक्शन की दरों में बड़े पैमाने पर इजाफा हो रहा है, जो हर घर को बिजली देने के लिये चलाये जा रहे अभियान पर एक बड़ा सदमा है।
उन्होंने कहा कि उप्र सरकार व केन्द्र सरकार को यह बात समझनी होगी कि बिजली की इन सेवाओं पर कभी भी सर्विस टैक्स नहीं लिया गया, अब उस पर जीएसटी लगाया जाना पूरी तरह गलत है। मीटर कास्ट पर जीएसटी लगाने का क्या औचित्य है? एक बार पहले ही मीटर खरीदते वक्त जीएसटी की वसूली हो चुकी है। अब पुनः उस पर जीएसटी उपभोक्ताओं से वसूल करना पूरी तरह असंवैधानिक परिपाटी की ओर इंगित कर रहा है।







