- सुप्रीम कोर्ट द्वारा पदोन्नति में आरक्षण का लाभ तभी पा सकते हैं प्रदेश के दलित कार्मिक जब उप्र सरकार पदोन्नति में आरक्षण लागू करने का कानून आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3(7) करे बहाल, संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री जी से इस मुद्दे पर मांगा समय
- संघर्ष समिति ने किया ऐलान पदोन्नति में आरक्षण के लिये 8 लाख दलित कार्मिक हर कुर्बानी देने के लिये तैयार, इसी माह लखनऊ में होगा विशाल सम्मेलन, जिसमें होगा आर-पार की लड़ाई का ऐलान
लखनऊ, 06 जून। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पदोन्नति में आरक्षण पर दिये गये निर्णय के क्रम में आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों की आज एक आपात बैठक हुई, जिसमें आरक्षण समर्थक कार्मिकों ने कहा कि मा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश की कानून की परिधि में पदोन्नति में आरक्षण दिया जा सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2012 में पारित आदेश के तहत प्रदेश में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3 (7) व परिणामी ज्येष्ठता 8(क) को अल्ट्रावायरस घोषित कर दिया गया था, ऐसे में वर्तमान में उप्र में पदोन्नति में आरक्षण दिये जाने का कोई भी कानून लागू नहीं है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश कि कानून की परिधि में पदोन्नति में आरक्षण दिया जा सकता है।
वह तब तक प्रदेश के दलित कार्मिकों के लिये लाभकारी सिद्ध नहीं होगा। जब तक पुनः भाजपा सरकार द्वारा आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3(7) को बहाल नहीं कर दिया जाता। वहीं आज संघर्ष समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि दलित कार्मिक पदोन्नति में आरक्षण का लाभ लेने के लिये इसी माह व्यापक आन्दोलन खड़ा करने के लिये एक दिवसीय आरक्षण बचाओ सम्मेलन भी करने जा रही है, जिसमें आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांगा समय।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, डा रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, राकेश पुष्कर, महेन्द्र सिंह, रीना रजक, लेखराम, राम औतार, अशोक सोनकर, दिनेश कुमार, वीके आर्या, प्रेम चन्द्र, अजय चौधरी, रेनू, अनीता, प्रभुशंकर, सुनील कनौजिया ने कहा कि प्रदेश की सरकार को सुप्रीम कोर्ट आदेश की परिधि में यदि दलित कार्मिकों को राहत देना चाहती है तो उसे अविलम्ब कार्यवाही शुरू करनी चाहिए, जिस प्रकार से रिवर्शन के समय सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही एक माह के अन्दर ही प्रदेश के 2 लाख दलित कार्मिकों को पदों व वरिष्ठता में रिवर्ट कर दिया गया था। अब देखना है कि उप्र की योगी अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कितनी तेजी दिखाती है। प्रदेश का 8 लाख दलित कार्मिक बड़े आन्दोलन के लिये तैयार है, जो अपने संवैधानिक हक की लड़ाई के लिये हर कुर्बानी देने के लिये तैयार है।







