बीबीएयू छात्रों की भ्रस्टाचार के खिलाफ जंग
लखनऊ, 06 जून। दोहरा वेतन पाने के मामले बीबीएयू लखनऊ के कुलपति प्रोफेसर आर सी सोबती बुरी तरह से फंस गए है इस मामले मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उनके खिलाफ रिकवरी नोटिस जारी किया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रोफेसर श्री आर सी सोबती के खिलाफ ये मामला तब सामने आया जब एक आरटीआई कार्यकर्ता ने दोहरा वेतन पाने के मामले में जानकारी मांगी, तो पता चला कि प्रोफेसर साहब पंजाब यूनिवर्सिटी से 4-11-2013 में रिटायर हुए थे, जहाँ से उनको पेंशन मिल रही थी। इसके बाद उन्होंने बीबीएयू लखनऊ में कुलपति का कार्यभार संभाला, जहाँ से उन्हें सैलेरी मिल रही थी। जो क़ानूनी रूप से गलत है। कुछ लोगो ने इस मामले की शिकायत मानव संसाधन विकास मंत्रालय में की थी। जिस पर मंत्रालय ने वीसी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रिकवरी करने का आदेश जारी कर दिया।
इस मामले में अम्बेडकर यूनिवर्सिटी दलित स्टूडेंट्स यूनियन (AUDSU) छात्र संगठन का कहना है कि हम लगातार विवि में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उसी भ्रष्टाचार में से एक कड़ी यह भी थी कि कुलपति प्रो सोबती अपने पूर्व पंजाब विश्वविद्यालय से बराबर पेंशन ले रहे थे और इसके अलावा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ में कुलपति होने का वेतन भी ले रहे थे। जिसकी शिकायत AUDSU सहित कई सामाजिक संगठनों ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, यूजीसी, मानव संसाधन विकास मंत्रालय से थी।
छात्र संगठन का कहना है कि आज मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बीबीएयू कुलपति प्रो आर सी सोबती के द्वारा नियमों के विरुद्ध मनमाने तरीके से दो जगह से वेतन लेने के कारण की गई शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कुलपति को वेतन और पेंशन से सम्बंधित सारे नियमों को बताकर कुलपति को इसमें दोषी पाया और कुलपति द्वारा लिए गए ज्यादा वेतन की रिकवरी करने का आदेश जारी कर दिया है।

छात्र संगठन का यह भी कहना है कि मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस में विवि प्रशासन को साफ आदेश जारी किया गया है कि कुलपति से वेतन की रिकवरी तुरन्त की जाए। क्योकि कॉलेज में अफवाह यह भी है कि कुलपति अब इस विवि को छोड़ने वाले हैं, जिससे वह No dues भी करवाएंगे।
हालांकि पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि कुलपति के पूरा वेतन और पेंशन लेने के मामले में कई शिकायतें मिली। इसका डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक ग्रीवेंस एंड ट्रेनिंग के साथ मिलकर पुनर्परीक्षण किया गया डीओपीटी ने साफ किया कि ऐसे पेंशनर जिन्हें 55 वर्षीय सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति दी गई है उन्हें पेंशन की रकम काटकर वेतन दिया जाएगा। इस मामले में यूजीसी ने भी प्रोफेसर को कोई विशेष छूट नहीं दी हैं। ऐसा बीबीएयू के नियमों में नहीं है।
सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार एक खबर यह भी है कि कॉलेज में अफवाह है कि कुलपति इस रिकवरी मामले को लेकर काफी परेशान है और फ़िलहाल वह देश छोड़ने की फिराक में हैं एक सूत्र के हवाले से खबर मिली हैं कि उनका 9 तारीख की डेट में लंदन का टिकट कन्फर्म हो गया है। इस बारे में एक खबर यह भी है वो कनाडा भी जा सकते है।
एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अभी और बड़ी मछलियां का फंसना बाकि है क्योंकि वित्त अधिकारी ने एक प्रो और कुलपति द्वारा किये भ्रष्टाचार को उजागर करने का कार्य किया है। इस वजह से ये भ्रष्ट अधिकारी खुद को बचाने के लिए वित्त अधिकारी को भी हटा सकते हैं।
उसने बताया कि अभी हाल में ही वित्त अधिकारी और प्रो के बीच हुई हवाई किराए को लेकर हुई गरमागरम बहस का ऑडियो वायरल हुआ था। जिसमे प्रो. वित्त अधिकारी पर नियमों के विरुद्ध रुपया जारी करने का दबाव बना रहे थे और वित्त अधिकारी को अपने रसूख का इस्तेमाल करके धमका रहे थे। जिसमें वित्त अधिकारी ने प्रो जायसवाल को साफ शब्दों में कहा है कि “कैसे उन्होंने विवि की रजिस्ट्रार डॉ सुनीता चंद्रा को षड्यंत्र के तहत हटा दिया था”।







