ओम माथुर
ऐसी हाई सिक्योरिटी जेल का क्या मतलब,जिसके भीतर बैरक में हत्या कर दी जाए। ऐसी हाई सिक्योरिटी जेल का क्या औचित्य जिसमें बाहरी सुरक्षा तो त्रिस्तरीय हो,लेकिन भीतर हत्या होने के चार घंटे बाद यह पता लगे की क्या कांड हो गया है। ऐसी हाई सिक्योरिटी जेल का क्या फायदा,जिसमें सबसे ज्यादा कुख्यात और हार्डकोर अपराधियों को रखा जाता हो और निगरानी का सबसे मजबूत तंत्र सीसीटीवी कैमरे ही बंद हो। ऐसी हाई सिक्योरिटी जेल से क्या लाभ जिसकी बाहरी दीवारें तो 40 फीट ऊंची हो और उन पर लगे लोहे के तारों पर बिजली का करंट दौड़ता हो, लेकिन भीतर बैरक में ही गमछे से गला दबाकर हत्या कर दी जाती हो।
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल कोई साधारण जेल नहीं है। इसके लिए कहा जाता है कि यहां कोई परिंदा भी ऊपर नहीं मार सकता और एक बार कोई अपराधी इस जेल में आ जाता है, वह दोबारा अपराध करने से पनाह मांग लेता है। यह ठीक भी हो सकता है। लेकिन क्या बाहरी सुरक्षा के साथ ही भीतरी सुरक्षा जरूरी नहीं है। जब यह कहा जा रहा है कि सुबह दस बजे नाश्ते के दौरान डकैत जगन गुर्जर और उसकी हत्या करने वाले विष्णु के बीच विवाद हुआ था, तो उसके बाद भी जेल स्टाफ ने उन्हें अलग रखने की वजह एक साथ क्यों छोड़ दिया। जिस दौरान सुबह 11से दोपहर 3 बजे तक सेल बंद रहता है, उस दौरान क्या उनमें बंद अपराधियों पर सीसीटीवी कैमरों से नजर नहीं रखी जाती है कि भीतर बंद कैदी क्या कर रहे हैं।
हाई सिक्योरिटी जेल में पहले भी तलाशी अभियानों में मोबाइल, सिम, चार्जरऔर स्मार्ट वॉच बरामद हो चुकी है। जेल से अपराधियों द्वारा गैंग आपरेट करने,व्यापारियों को रंगदारी के लिए धमकी देने के मामले भी हुए हैं। सवाल ये है कि जब जेल में मोबाइल जैमर और कॉल डिक्टेशन की निगरानी है, तो फिर यह सब संभव कैसे हो रहा है। क्या इसमें जेल कार्मिक शामिल है,जो कुछ पैसों के लालच में अपराधियों को के सामान पहुंचाते हैं। राज्य की कई जेलों में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं जिसमें जेल कर्मचारियों की मिलीभगत से अपराधी अंदर होने के बाद भी बाहर अपना खेल जारी रखते हैं। लेकिन सिक्योरिटी जेल में ऐसा होना गंभीर बात है। कितै विरोधाभास है कि हाई सिक्योरिटी यानी उच्च सुरक्षा वाली जेल में सबसे बड़ा बड़ा यानी हत्या हो जाए। जगन गुर्जर के परिजनों की हत्या की जांच की मांग के साथ ये भी जांच होनी चाहिए कि सीसीटीवी कैमरे बंद होने जैसी सुरक्षा में लापरवाही किसकी है।







