- अमित शाह के घर हुई बैठक के बाद बीजेपी का बड़ा फैसला, महबूबा मुफ्ती ने दिया इस्तीफा
- राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग
नई दिल्ली, 19 जून। भाजपा ने जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया है और राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की हैं। मंगलवार को यह फैसला अमित शाह के घर जम्मू-कश्मीर के भाजपा कोटे के मंत्रियों से बैठक के बाद लिया गया।
गौरतलब है कि रमजान के पवित्र माह को देखते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीजफायर की घोषणा की थी, रमजान तुरंत बाद अब इसे खत्म करते हुए रविवार को गृहमंत्री ने घाटी में आतंकियो के खिलाफ ऑपरेशन ऑल आउट के निर्देश दिए थे।
जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने रमजान के दौरान घाटी में सीजफायर के लिए सरकार से गुहार लगाई थी, जिसको सरकार ने मान लिया था। हालांकि इसका कुछ लाभ नहीं हुआ और पाकिस्तान की तरफ से 30 से ज्यादा बार सीजफायर का उल्लंघन किया गया। वहीं सीजफायर खत्म होते ही भाजपा और पीडीपी के बीच खटपट की खबरें सामने आने के बाद भाजपा ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ने का फैसला ले लिया। आपको बता दें कि इस मामले में मंगलवार सुबह दिल्ली में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के घर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पहुंचे और उनसे मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की है।
2015 में बनी थी भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में सन 2015 में भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनी थी। गठबंधन के बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बनाए थे। जबकि डिप्टी सीएम भाजपा के खाते में गया था। मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 1 मार्च 2015 को जम्मू-कश्मीर के 12वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। 7 जनवरी 2016 को इनका निधन हो गया। जब सईद का निधन हुआ तब वह मुख्यमंत्री थे। जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की अचानक मौत के बाद राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया। उसके बाद कश्मीर में सरकार बनाने को लेकर एक बार फिर खींचतान शुरू हो गई। जिसके बाद फिर पीडीपी-भाजपा सरकार बनाने के लिए तैयार हो गई। ढाई महीने के बाद 4 अप्रैल 2016 को महबूबा मुफ्ती पहली महिला मुख्यमंत्री जम्मू-कश्मीर की बनीं। जबकि उपमुख्यमंत्री भाजपा के विधायक निर्मल सिंह को बनाया गया। लगभग 25 महिने चली सरकार का आज अंत हों गया और भाजपा और पीडीपी अलग हो गए।
उमर अब्दुल्ला ने की राज्यपाल से मुलाकात
जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार से भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया है। इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद महबूबा मुफ्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। महबूबा के इस्तीफा देने से साथ ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला राज्यपाल से मुलाकात करने गए। जिसके बाद इस आशंका को बल मिला कि वह भाजपा के साथ मिल कर जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने का दावा कर सकते हैं। अब्दुल्ला पहले भी भाजपा के साथ रह चुके हैं। बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल के दौरान नेशनल कॉफ्रेंस एनडीए का हिस्सा रही है और उमर अब्दुल्ला उस समय केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री थे। इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस की आज एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसके बाद से राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर हलचलें तेज हो गई हैं।
अनेक मोर्चों पर फेल रही मुफ्ती सरकार: माधव
जम्मू-कश्मीर की महबूबा सरकार से भाजपा ने नाता तोड़ लिया है। भाजपा महासचिव राम माधव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी पार्टी जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन से बाहर हो गई है। इसके साथ ही हम राज्य में राज्यपाल शासन का समर्थन करते हैं। माधव ने कहा अनेक वजहों से राज्य में गठबंधन सरकार में बने रहना भाजपा के लिए मुनासिब नहीं रह गया था।
भाजपा को समझाया था: आजाद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समझाया था कि पीडीपी के साथ गठबंधन करके हमने जो गलती की थी वह आप मत कीजिए। हालांकि भाजपा के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि हम सही थे। उन्होंने पीडीपी के साथ किसी भी तरह के गठबंधन और सरकार बनाने की संभावना को समाप्त कर दिया है।







