मुंबई, 22 जून। अभी तक दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप का इस्तेमाल मैसेज, कॉल, वीडियो-फोटो सेंड करने के अलावा बिजनेस के लिए भी हो रहा है। ऐसे में अगर आप से कहा जाए की अब आपका बैंक भी आपको नोटिस भेजने के लिए व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करेगा तो शायद ही आप इस पर विश्वास करेंगे। जी हां वैसे तो आपको इस पर विश्वास नहीं होगा लेकिन ये सच है।बॉबे हाईकोर्ट ने व्हाट्सऐप के जरिए भेजे गए नोटिस को वैध बताया है।
अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए व्हाट्सऐप पर भेजे गए नोटिस को वैध बताते हुए कहा कि बैंक से बच रहे डिफाल्टर ने पीडीएफ फाइल में नोटिस देखने के साथ खोलकर भी पढ़ा है इसलिए इसे वैध माना जाएगा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मुंबई के नालासोपारा में रहने वाले रोहिदास जाधव पर 2010 में एसबीआई क्रेडिट कार्ड का 85 हजार रुपए बकाया था। सुनवाई के दौरान 2011 में हाईकोर्ट ने रोहिदास को 8 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने के लिए कहा। लेकिन उसने बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद बैंक के कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विस डिपार्टमेंट की ओर से 2015 में 1.17 लाख रुपए के बकाए के लिए केस किया। लेकिन बीच में ही जाधव ने अपना घर शिफ्ट कर दिया और एसबीआई उसे लीगल नोटिस सर्व नहीं कर पाया।
हालांकि एसबीआई कार्ड्स डिपार्टमेंट के पास जाधव का मोबाइल नंबर था और बैंक के री-प्रेजेंटेटिव ने जाधव को अगली सुनवाई के बारे में व्हाट्सऐप पर जानकारी दी। इसके साथ ही केस लड़ रहे वकील मुरलीधर काले ने जाधव के मोबाइल नंबर पर नोटिस की पीडीएफ कॉपी भी भेज दी। केस की सुनवाई के दौरान मुरलीधर ने इस मामले में अदालत को बताया कि जाधव ने नोटिस रिसीव करने के साध उसे पढ़ा भी है और ब्लू टिक से यह साफ हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि जाधव ने बार-बार घर बदला ऐसे में उन्हें नोटिस नहीं भेजा जा सका। उनके पास जाधव का फोन नंबर था जिस पर नोटिस भेज दिया गया जिसे कोर्ट ने अपने रिकॉर्ड में भी ले लिया। कंपनी ने क्रियान्वयन याचिका के साथ हाईकोर्ट की शरण ली क्योंकि जाधव ने उसके कॉल उठाने बंद कर दिए। साथ ही उसके अधिकारियों से मिलने से इनकार कर दिया।
केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस पटेल ने अपने आदेश में कहा कि कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर 1908 के ऑर्डर नंबर XXI के नियम 22 के तहत नोटिस तामिल करने के मकसद से मैं इसे स्वीकार करुंगा। मैं इसलिए ऐसा कर रहा हूं क्योंकि व्हाट्सऐप में यह स्पष्ट दिख रहा है कि अदालत ने कंपनी से कहा कि वह सुनवाई की अगली तारीख तक आरोपी का आवासीय पता पेश करे ताकि यदि आवश्यकता पड़े तो उसके खिलाफ वारंट जारी किया जा सके।







