- डायरी ने खोले राज: पिता की आत्मा के प्रवेश के लिए खुला छोड़ा घर का गेट
- पिता की आत्मा आएगी और हम सब को बचा लेगी!
नई दिल्ली, 07 जुलाई। साइंस के इस युग में अंधविश्वास के हद पराकाष्टा किस कदर व्याप्त है इस बात का उदहारण दिल्ली के बुराड़ी का 11डेथ मिस्ट्री साबित करता है। जहाँ पहला सवाल भाटिया परिवार में वारदात वाली रात घर का मुख्य दरवाजा और पहली मंजिल पर बने कमरे का दरवाजा क्यों खुला छोड़ा था? इसका राज उनके घर से मेरी डायरी से खुल गया है। पुलिस का दावा है कि ललित की डायरी में लिखा है कि क्रिया के दौरान घर के सभी गेट खुले रखने हैं ताकि पिताजी की आत्मा घर में आराम से प्रवेश कर के परिजनों को उम्मीद थी कि घर में प्रवेश करने के बाद पिताजी उन्हें बचा लेंगे।
डायरी में लिखे एक पन्ने के अनुसार ललित ने परिजनों से कहा था कि उसके सपने में पिता भोपाल सिंह ने आकर बताया है कि उनकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिली है। यही वजह है कि वह घर में भटक रहे हैं ललित ने इसी पन्ने पर लिखा है कि पिता भोपाल सिंह के अलावा इस घर में सज्जन सिंह, हीरा, दयानंद देवी, गंगा देवी की आत्मा की मौजूद है। उन्हें भी मुक्ति नहीं मिली है ललित के पिता ने उसे कहा था कि अब तुम पांचों आत्माओं को मुक्ति दिलाने के लिए काम करोगे इसी पन्ने पर लिखा है कि तुम सोचते होंगे कि हरिद्वार जाकर सब हो आए तो मुक्ति मिल जाएगी।
ऐसा नहीं है जैसे मैं मुक्ति के लिए भटक रहा हूं ऐसे ही यह सभी मेरे सहयोगी बने हुए हैं यह भी यही चाहते हैं कि तुम सब सही कर्म करके अपना जीवन सफल बनाओ। अगर सारे नियमित काम पूरे हो जाएंगे तो हम अपने लोग चले जाएंगे अब जैसे -जैसे हम कहते हैं वैसे -वैसे करो तो सभी को मुक्ति मिल जाएगी पुरानी डायरी में आत्माओं को मुक्ति दिलाने की बात लिखी थी जबकि 16 जून को लिखी डायरी मैं ललित ने पूरे परिवार को मुक्ति मुक्ति मिलने की बात लिखी उसने लिखा कि इस क्रिया के बाद कुछ लोगों को मुक्ति मिल जाएगी और पूरा परिवार एक नई शुरुआत करेगा सभी अपने नियमित काम पूरे करने के बाद अपने अपने लोग चले जाएंगे। दोनों भाइयों को पढ़ने के बाद पुलिस का मानना है कि अंधविश्वास की सभी की वजह से सभी की जान चली गयी।

सभी 11 शवों का मनोवैज्ञानिक पोस्टमार्टम होगा
नई दिल्ली, 07 जुलाई। दिल्ली पुलिस ने रहस्मय तरीके से एक परिवार के 11 सदस्यों की मौत के मामले की तह तक जाने के लिए परिवार की मानसिकता का पता लगाने के वास्ते शवों को मनोवैज्ञानिक पोस्टमार्टम के हवाले करने का निर्णय लिया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मीडिया को यह जानकारी दी इस प्रकार का पोस्टमार्टम करने वाला चिकित्सक कौन होगा अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ है!
इस प्रकार के पोस्टमार्टम में परिवार के सदस्यों की मानसिकता और मृतक की दिमागी हालत की मैपिंग की जाती है। उन्होंने बताया कि इस मामले में उनकी घटनास्थल से बरामद से तपस्या का अभ्यास करने की बात सामने आई है। जिसमें लोग बरगद का पेड़ और और उस की टहनियां बनने की कोशिश करते हैं उन्होंने कहा कि विशेषयज्ञ उनकी इस मानसिकता के बारे में जानने का प्रयास करेंगे।
इस डायरी में लिखा है कि इस प्रकार के अभ्यास से भगवान प्रसन्न होंगे। पुलिस को इस मामले में अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने का इंतजार है।







