नई दिल्ली, 10 जुलाई 2018: उच्चतम न्यायालय ने दुनिया के सात अजूबों में शामिल आगरा के ऐतिहासिक ताजमहल में बाहरी लोगों को नमाज अदा करने की अनुमति देने संबंधी याचिका सोमवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने ताजमहल में बाहरी लोगों के नमाज अदा करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। पीठ न्यायमूर्ति अशोक ऍम खान विकलकर और डीवाई चंद्रचूड़ शामिल है।
बता दे, इस याचिका में न्यायालय से जिला प्रशासन को निर्देश देने की गुहार की थी, कि वह बाहर के लोगों को ताजमहल में नमाज पढ़ने की इजाजत दें। शीर्ष अदालत ने कहा की ऐतिहासिक ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को हर हाल में संरक्षित रखा जाना चाहिए। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा 24 जनवरी को ताजमहल में बाहरी लोगों के नमाज अदा करने पर रोक लगाने के बाद याचिकाकर्ता ने इसके विरुद्ध न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ताजमहल में नमाज अदा करने की कोई जरूरत नहीं है नमाज किसी अन्य स्थान पर भी अदा की जा सकती हैं।
कोर्ट ने पूरी कार्यवाही के लाइव प्रसारण की की तैयारी
केंद्र ने आज उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि देशभर में अदालती कार्रवाई का सीधा प्रसारण किया जा सकता है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ऍम खान विकलकर और न्यायमूर्ति धनंजय भाई चंद्रचूड़ की 3 सदस्य खंडपीठ ने सभी पक्षकारों से कहां की अदालत की कार्रवाई के सीधा प्रसारण के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के बारे में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को अपने सुझाव दें। शीर्ष अदालत ने 3 मई को न्यायिक कार्यवाही के सीधा प्रसारण, वीडियो रिकॉर्डिंग, लिप्यांतरण के बारे में केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। अटार्नी जनरल ने इससे पहले न्यायमूर्ति से कहा था अदालती कार्रवाई का सीधा प्रसारण दुनिया अनेक देशों में स्वीकार्य परम्परा है।







