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    Home»बिजनेस

    जीएसटी की राह आसान या कठिन?

    By July 22, 2018Updated:July 22, 2018 बिजनेस No Comments6 Mins Read
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    जी क़े चक्रवर्ती

    हमारे स्वतंत्र देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधार के दृष्टिकोण से जीएसटी को सम्पूर्ण देश में 1 जुलाई 2017 से लागू हो गया था।

    जीएसटी का प्रभाव कम या ज्यादा लगभग सभी चीजों पर हुआ। हमारे देश मे जीएसटी भले ही पहली बार लागू हुआ हो, लेकिन दुनिया के कुछ देशों के लिए यह नया नहीं है।

    जीएसटी का पूरा अर्थ “गुड्स एंड सर्विस टैक्स” होता है यह एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर प्रणाली यानी इंडायरेक्ट टैक्स है। जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया गया है। पहले राज्य और केंद्र सरकारें वस्तुओं पर अपने -अपने अलग-अलग कर लगाती थीं। लेकिन अब उपभोक्ताओं को केवल एक ही कर देना पड़ेगा।  इस टैक्स में राज्य और केंद्र सरकार दोनो का अपना-अपना हिस्सा होगा।

    फ्रांस ने अपने यहां टैक्स चोरी रोकने के लिए वर्ष 1954 में सबसे पहले अपने देश मे जीएसटी लागू किया था। उसके बाद से लगभग 160 देशों ने अपने यहाँ वर्तमान समय मे जीएसटी / वैट लागू है। जबकि कनाडा, ब्राजील जैसे बहुत से देशों में दोहरी-जीएसटी (राज्य का अलग से और देश का अलग से जीएसटी) लागू है। दुनिया के इन्ही देशों की तरह भारत ने भी दोहरी जीएसटी प्रणाली अपने देश मे भी लागू करने का फैसला ले कर उसे लागू कर दिया है।

    भारत के साथ ही सम्पूर्ण एशिया के देशों में जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स के स्तरों को चार हिस्सों में (5, 12, 18, 28 प्रतिशत) में बांटा दिया गया है। हमारे देश भारत में जीएसटी के अन्तर्गत 1211 वस्तुओं पर टैक्स तय है। अगर भारत के जीएसटी और एशिया में उसके समकक्ष देशों के जीएसटी का तुलना करें तो दोनों में जमीन आसमान का अंतर नजर आता है।

    हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में भले ही हमसे  पूर्व वर्ष 2013 जून से ही जीएसटी लागू हो गया था, इसके बावजूद जीएसटी के अलावा सर्विस टैक्स व अन्य तरह के टैक्स वहां लागू हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, पाकिस्तान और चीन जैसे देशों में जीएसटी का मानक दर हमसे बहुत कम है। यहां मानक दर क्रमश: 10, 6, 15, 7, 17, 17 फीसदी है। जबकि अमेरिका जैसा देश जो दुनिया की इकलौती ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था है, कि जिसने अपने देश मे जीएसटी अभी भी लागू नहीं किया है। यहां टैक्स की दरों को तय करने का अधिकार राज्यों पर छोड़ दिया गया है।

    हमारे देश मे जीएसटी का भविष्य क्या होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन दुनिया में कई ऐसे देश हैं, जो आज भी इससे जूझ रहे हैं। भारत जैसा ही कनाडा में भी दोहरी जीएसटी लागू है। यहां के विपक्षी दलों के लोगों द्वारा जीएसटी का जमकर विरोध किये जाने के कारण कनाडाई सरकार ने जीएसटी लागू करने के बाद भी करीब दो बार उसको कर दरों को कम करना पड़ा है। इसी तरह वर्ष 1994 में जब सिंगापुर में जीएसटी लागू हुआ था उस वक्त यहां पर भी बहुत मंहगाई बढ़ गई थी मलेशिया जैसे देश में पूरे 26 वर्षों के लगातर बहस के बाद वर्ष 2015 में अपने देश मे जीएसटी लागू किया गया था।

    इस तरह यह देखने में आता है कि जीएसटी के लागू होने के बाद जीएसटी की दर कम किया गया हो या न हो मूल्यों में बृद्धि अवश्य हुई है। ऑर्गनाइजेशन ऑफ इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलप्मेंट (ओयसीडी OECD) 30 देशों का संगठन है। जिनके ओयसीडी के अनुसार, 21 देशों ने वर्ष 2009 से वर्ष 2011 के बीच जीएसटी रेट को बढ़ाया। वहीं हमारे देश भारत में पेट्रोल, शराब, तंबाकू आदि सामग्रियों को जीएसटी के दायरे से बाहर नहीं रखा गया है, बल्कि हमारे यहां सभी उत्पादों को जीएसटी के दायरे में रखा गया है और इन सभी पर जीएसटी की एक समान दर लागू है। हां यह बात अवश्य है कि दुनिया के अन्य देशों में भारत की तरह अलग-अलग राज्य व्यवस्था की चुनौती अवश्य नहीं है।
    फैक्टरीयों से वस्तुएं बनकर निकलते ही उस पर कई तरह के कर लगाये जाते हैं। फैक्टरी से तैयार हो कर माल के बाहर आते ही सबसे पहले वस्तु पर उत्पाद शुल्क यानी की एक्साइज ड्यूटी लगाया जाता है। कभी-कभी तो अतिरिक्त उत्पादन शुल्क भी लगई जाती है। इन सबों के अलावा जनता के टैक्स का एक बहुत बड़ा हिस्सा भी उसमे जुड़ा होता है सेवा कर (सर्विस टैक्स) यदि हम रेस्तरां में खाना खाते हैं, तब उसमे लगता है इन सबके अलावा मोबाइल बिल आता है, या क्रेडिट कार्ड का बिल आता है, तो प्रत्येक जगह यह कर लग जाता है जो 14.5 फीसदी तक होता है।
    देश में टैक्स को चार स्तरों में बांटने की बात पर वित्त मंत्री मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा था कि हमारे देश मे जीएसटी की अलग-अलग टैक्स स्तरों का रखना जरूरी है क्योकि विकसित देशों में लोग एक हवाई चप्पल और कार पर एक समान कर चुकाने में समर्थ हैं वहीं पर भारत में ऐसा कर पाना संभव नहीं है। यहां लोगों के पास इतना धन नहीं है कि वे एकसमान टैक्स सभी वस्तुओं पर चुका सके, लिहाजा हमारे देश मे लोगों की जरूरतों का ध्यान रखते हुए अलग-अलग टैक्स स्तर तैयार किया है। इन सब बातों के अलावा मौजूदा समय मे 178 वस्तुओं पर जीएसटी की दर घटा कर 18 प्रतिशत कर दिया गया था। पहले इन वसुओं पर 28 प्रतिशत की दर से कर लागू था। अभी हाल ही में गुवाहटी में हुई दो दिवसीय जीएसटी परिषद की बैठक में 211 वस्तुओं पर की जीएसटी दरों में बदलाव किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी परिषद की बैठक के बाद कहा कि 178 वस्तुओं पर जीएसटी दर घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। जीएसटी की नई दरें 15 नवंबर से लागू हो जायेगी।
    जीएसटी परिषद की शनिवार के दिन एक बैठक हुई जिसमे कई उत्पादों की कर दरों में परिवर्तन किया गया है। जीएसटी को और अधिक लचीला बनाने के लिए दैनिक उपभोग में लायी जाने वाली लगभग सौ वस्तुओं पर दाम रिवाइज किये गए हैं इस परिषद की बैठक के बाद वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉफ्रेंस में बताया कि सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) से मुक्त कर दिया गया है। इसकी बहुत दिनों से मांग उठ रही थी। सैनिटरी नैपकिन पर 12 प्रतिशत का कर लगाया जा रहा था। जिसकी चौतरफा आलोचना हो रही थी इसके अलावा प्रिंट मीडिया से लेकर छपाई के कारोबार तक को इस कर के दायरे में लाना कहाँ तक उचित है जब कि देश मे इलेक्टॉनिक्स युग के शुरुआत हो जाने से यह व्यवसाय पहले से ही दबाव में था। इसको बचाये रखने के लिए यह और भी आवश्यक हो गया था कि इसको सभी तरह की करों से मुक्त रखा जाना चाहिए था । फिलहाल जीएसटी कर प्रणाली हमारे देश मे कहाँ तक कामियाब होगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

    #GST

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