- वीवीपैट मशीन की आपूर्ति न होने से 2019 चुनाव में देरी
- मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक डिलीवरी में केवल डेढ़ महीने की देरी होगी
नई दिल्ली, 30 जुलाई 2018: 2019 में प्रस्तावित आम चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो चली है। पहले कहा जा रहा था कि आम चुनाव समय से पहले हो सकता है, लेकिन अब चुनाव समय से पहले करवाना मुश्किल नहीं बल्कि असंभव दिख रहा है। क्योंकि चुनाव के लिए वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल मशीन (वीवीपैट) समय पर उपलब्ध नहीं हो सकेगा।
सूचना के अधिकार (आरटीआई) के अंतर्गत यह जानकारी मिली है। चुनाव आयोग ने वीवीपैट, बैलेट यूनिट और कंट्रोल यूनिट के लिए दो कंपनियों को पिछले साल सितंबर में ऑर्डर दिए थे, जिनकी डिलीवरी इसी साल सितंबर तक होनी थी, लेकिन ये कंपनियां इस लक्ष्य को पाने में नाकाम रही है।
19 जून तक तय लक्ष्य का सिर्फ 22 फ़ीसदी ही वीवीपैट किया गया है। ऐसे में वीवीपैट डिलीवरी में देरी होनी तय है। जिसकी वजह से समय से पहले चुनाव कराना असंभव नजर आ रहा है। इस बारे में मुख्य चुनाव आयुक्त मानना है कि ये सच है कि इलेक्ट्रॉनिक मशीनों और वीवीपैट की डिलीवरी में देरी हुई है, लेकिन नवंबर तक सारी वीवीपैट मशीनें डिलीवर हो जाएंगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक डिलीवरी में केवल डेढ़ महीने की देरी होगी। दो कंपनियों को ज़िम्मेदारी दी गई है। इनमें से एक कंपनी 7 नवंबर और दूसरी कंपनी 15 नवंबर तक मशीनें डिलीवर कर देगी। आपको बता दें कि पिछले साल नवंबर में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति ने कहा था कि निर्वाचन आयोग को सितंबर 2018 तक 40 लाख वीवीपैट मशीनें व ईवीएम मिलेंगी, जिनका इस्तेमाल 2019 के आम चुनावों में होगा। केंद्र ने निर्वाचन आयोग को 40 लाख मशीनों की खरीद के लिए 5,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
उन्होंने कहा था कि हमें 23 लाख से ज्यादा ईवीएम व 16 लाख वीवीपैट मशीनों की जरूरत 2019 के चुनावों के लिए है। गौरतलब है कि वीवीपैट (वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) मशीन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़ी होती हैं, जिसमें एक मतदाता द्वारा मतदान करने पर उम्मीदवार का नाम व जिस पार्टी के पक्ष में उसने वोट डाला है उसके चुनाव चिन्ह की पर्ची आती है।







