कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर सीधा हमला बोलते हुए इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने चुनाव आयोग को “खलनायक” करार देते हुए भारी साजिश और धांधली का आरोप लगाया।
“हम हारे नहीं, जबरन हराया गया”
ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में आग उगलते हुए कहा, “मैं क्यों जाऊंगी लोकभवन? हम तो हारे नहीं हैं, जो जाएंगे। अगर मैं जीत जाती तो शपथ से पहले इस्तीफा दे जाती, लेकिन लोकभवन जाने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता।”
उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी नैतिक रूप से जीती है, लेकिन “चोरी करके” हराया गया। ममता ने कहा, “चुनाव आयोग और भाजपा के बीच यह मिलीभगत है। हमने पूरी सरकारी मशीनरी, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ लड़ाई लड़ी।”
चुनाव आयोग पर लगाया गंभीर आरोप :
- ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर सबसे तीखे हमले किए:
- वोटिंग के बाद EVM में 80-90% चार्ज बाकी रहने का सवाल उठाया।
- चुनाव से दो दिन पहले TMC कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां और छापेमारियों का आरोप।
- पूरे IPS और IAS अधिकारियों को बदले जाने का दावा।
- आयोग को “लोगों के संवैधानिक अधिकार लूटने वाला” बताया।
उन्होंने कहा, “यह भाजपा और चुनाव आयोग के बीच बेटिंग है।”
काउंटिंग सेंटर पर मारपीट का आरोप
ममता बनर्जी ने खुलासा किया कि काउंटिंग सेंटर के अंदर उनके साथ धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने इसे “मेरा जीवन का सबसे खराब चुनाव” बताया और 2004 के चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि तब भी वे अकेली थीं, लेकिन ऐसा कभी नहीं देखा।
TMC का बड़ा फैसला : तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए 10 सदस्यीय टीम गठित कर दी है। यह टीम हार के कारणों और कथित अनियमितताओं की गहन जांच करेगी।
ममता ने खुद को “आजाद पंछी” बताते हुए कहा कि अब उनके पास कोई सरकारी कुर्सी नहीं है, इसलिए वे बिना किसी दबाव के बोल रही हैं।
ममता ने अपने संदेश में कहा : “मैं स्पष्ट कहती हूं कि हम हारे नहीं हैं। उन्हें लगा कि कुर्सी छिन जाएगी तो मैं इस्तीफा दे दूंगी, लेकिन ऐसा नहीं होगा।” ममता का यह बयान पश्चिम बंगाल की सियासी हलचल को और तेज कर गया है, जहां विपक्षी दलों की नजर अब आगे की रणनीति पर टिकी हुई है।






