पावर कार्पोरेशन ने बिलिंग साफ्टवेयर में किया बदलाव, उपभोक्ता परिषद ने जताई आपत्ति, कहा विभाग सरकार की छवि धूमिल करने पर आमादा, उपभोक्ता परिषद सोमवार को आयोग में दाखिल करेगा अवमानना याचिका
लखनऊ, 04 अगस्त 2018: उप्र पावर कार्पोरेशन द्वारा मनमाने तरीके से अपने बिलिंग साफ्टवेयर में अब यह व्यवस्था करा दी गयी है कि कोई भी विद्युत उपभोक्ता अपने मीटर की स्वयं रीडिंग लेकर ई सुविधा बिलिंग काउन्टर पर बिल बनवाकर महीने की 15 तरीख या उससे पहले नहीं जमा कर सकता।
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि विद्युत वितरण संहिता 2005 के अध्याय 6 की धारा-6.1 में जब उपभोक्ताओं को यह विकल्प दिया गया है कि उपभोक्ता स्वयं रीडिंग लेकर कभी भी बिल जमा कर सकता है। यदि विभाग चाहे तो उसे वेरीफाई करा सकता है, लेकिन उसकी इस सुविधा पर विभाग इस तरह की रोक नहीं लगा सकता।
विगत दिनों विद्युत वितरण संहिता में कुछ संशोधनों पर नियामक आयोग में बैठक बुलाई गयी थी, यदि विभाग को कोई दिक्कत थी तो वहां कानून बनाने की कमेटी में रखते। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। आयोग द्वारा बनायी गयी परिपाटी में पावर कार्पोरेशन को बदलाव का कोई भी अधिकार नहीं है। यह व्यवस्था बिजली विभाग में वर्ष 2000 से चली आ रही है। आयोग द्वारा उपभोक्ताओं को एडवांस बिल जमा करने का अधिकार दिया गया है, फिर इस प्रकार की कार्यवाही से उप्र सरकार की छवि धूमिल क्यों की जा रही है?
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कार्पोरेशन 100 करोड़ से ज्यादा के कन्सल्टेन्ट रखे हैं क्यों नहीं उन्हीं को लगाकर एक बार सत्यापन करा लें, केवल उपभोक्ताओं को परेशान करने के लिये इस प्रकार की परिपाटी शुरू की गयी है। जिसे प्रदेश का उपभोक्ता स्वीकार करने वाला नहीं है। इसलिये अविलम्ब पावर कार्पोरेशन को अपना मनमाना आदेश वापस लेना चाहिए।







