सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार, महिला एवं बाल विभाग से पूछा कि क्यों नहीं नाबालिग लड़कियों के साथ शेल्टर होम में यौन शोषण की घटना को होने से रोका गया
नई दिल्ली, 08 अगस्त 2018: मुजफ्फरपुर बाल आश्रय गृह में बलात्कार की खौफनाक घटनाओं को लेकर सर्वोच्च अदालत ने बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर क्यों नहीं इन बाल संरक्षण गृह की जांच की गई।
सर्वोच्च अदालत में मुजफ्फरपुर बाल गृह मामले कि मंगलवार को सुनवाई चल रही थी। जहां पर पिछले 4 वर्षों के दौरान 30 से ज्यादा लड़कियों का बलात्कार, उत्पीड़न और शोषण किया गया। मामले पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस केस पर राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से किसी भी मामले में यौन शोषण के पीड़ितों की तस्वीरें प्रकाशित या प्रदर्शित नहीं करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यौन शोषण की शिकार नाबालिगों का साक्षात्कार नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि इससे उनपर गंभीर मानसिक प्रभाव पड़ेगा। इस मामले में राजनीतिक रसूख वाले बृजेश ठाकुर के साथ ही करीब 10 लोगों कि इस मामले में अब तक गिरफ्तारी हो चुकी है। बृजेश ठाकुर की गैर सरकारी संस्था है जो कि कई बालिका गृह चलाती है। शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि कौन है जो बिहार के शेल्टर होम्स में पैसा दे रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की मुजफ्फरपुर आश्रय गृह चलाने वाले गैर सरकारी संगठन को राशि देने पर खिंचाई की जिसमें लड़कियों के साथ कथित तौर पर बलात्कार और यौन उत्पीड़न किया गया। न्यायालय ने राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो का हवाला देते हुए कहा कि भारत में हर 6 घंटे में एक महिला के साथ बलात्कार होता है। उच्चतम न्यायालय ने भारत में बलात्कार की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि महिलाओं के साथ हर तरफ बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं इससे पहले 2 अगस्त को शीर्ष अदालत की तरफ से मुजफ्फरपुर मामले को लेकर बिहार सरकार और केंद्र को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया था। अदालत ने मामले को संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार, महिला एवं बाल विभाग से पूछा कि क्यों नहीं नाबालिग लड़कियों के साथ शेल्टर होम में यौन शोषण की घटना को होने से रोका गया।







