डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रत्येक उपयुक्त अवसर का राष्ट्रीय गौरव और विकास की दृष्टि से बखूबी उपयोग करते है। इस बार स्वतंत्रता दिवस की पर आयुष्मान योजना लागू की गई, और स्वतंत्रता दिवस को लालकिले की प्रचीर से भारत की विकसित बनाने का संकल्प लिया गया। आयुष्मान योजना का लाभ पचास करोड़ लोगों को मिलेगा। दो वर्ष में पांच करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आ गए। छह करोड़ फर्जी नाम, ढाई लाख फर्जी कम्पनी पकड़ी गई। बिचौलिए हटाये गए। फर्जीवाड़ा रुका। गरीबों को लाभ मिला। तीन तलाक रोकने के लिए मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को विश्वास दिलाया। इस पर रोक लगाने का संकल्प व्यक्त किया।स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का संबोधन बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिस पर भारत ही नहीं विश्व की निगाहें रहती है। यह स्वतंत्र भारत की गौरवपूर्ण परंपरा है। अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों ने इसका बखूबी निर्वाह किया है। नरेंद्र मोदी ने इसमें दो तथ्य जोड़े है। पहला यह कि वह संबोधन की तैयारी से पहले नागरिकों के सुझाव आमंत्रित करते है, दूसरा यह कि इस अवसर पर वह किसी न किसी महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा करते है। इसमें सरकार के साथ साथ समाज और जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी का निर्धारण होता है।

स्वच्छता, जन-धन, आदर्श सांसद ग्राम, कौशल विकास, स्टैंड अप इंडिया योजना, मेक इन इंडिया जैसे अभियान मोदी ने यहीं से घोषित किये थे। इनमें से अनेक योजनाओं ने रिकार्ड बनाये है। अपने पहले भाषण में मोदी ने देश के सभी सांसदों से एक गांव गोद लेने की अपील की थी। मौजूदा समय में यह योजना दूसरे और तीसरे चरण में है। सीमित समय में करीब तीस करोड़ खाता खुल गए। उसमें सब्सिडी की धनराशि पहुंचने लगी। कौशल विकास, स्टार्ट अप, मेक इन इंडिया, आदि की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछली सरकार का मोदी ने नाम नहीं लिया। लेकिन दो हजार तेरह और आज की तुलना करके बहुत बड़ा सन्देश दिया। यह सही भी है कि जनधन, शौचालय, निर्धनों को आवास, बिजली उत्पादन, एलपीजी कनेक्शन, आदि कार्य पिछली सरकार की गति से किये जाते तो ,इतने कार्यो में कई पीढ़ी लग जाती। किसानों को पहली बार लागत का देड़गुना समर्थन मूल्य दिया गया। चार दशकों से लंबित जीएसटी,और वन रैंक वन पेंशन योजना लागू कर दी गई। बैंक से धन लेकर भागने की घटनाओं को रोकने का कानून बनाया गया, जबकि पहले इसे रोका गया। आर्थिक सुधार अर्थव्यवस्था के आधार को मजबूत बना। मल्टी विलीन डॉलर निवेश वाला देश बन गया। दुनिया की संस्थाए कह रही कि भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था को दिशा दे रहा है। विश्व की अनेक संस्थाओं में भारत को स्थान मिला। सौर ऊर्जा संघठन का नेतृत्व भारत कर दिया।
प्रधानमंत्री ने बालिकाओं, आदिवासी बच्चों के उल्लेखनीय कार्यो, सुरक्षा बलों के योगदान की प्रशंसा की। संसद में अनुसूचित जाति, जनजाति विधेयक पारित होंना और पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिलना सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मोदी ने तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती की कविता तमिल भाषा में सुनाई। जिसमें उन्होंने कहा था कि विश्व को भारत ही रास्ता दिखायेगा। मोदी ने रविन्द्र नाथ टैगोर की राष्ट्रीय गौरव वाली कविता का उल्लेख किया। इस प्रकार मोदी ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु तक एक सन्देश दिया।
भारत विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। निकट भविष्य में देश पांचवे स्थान पर आ जायेगा। चार करोड़ लोगों ने पहली बार मुद्रा बैंक लोन लिया। अब तक तेरह करोड़ लोग इससे कर्ज लेकर अपना व्यवसाय चला रहे है। पहली बार मंगल ग्रह तक हमारे उपग्रह पहुंचे। अंतरिक्ष तक गगन यान चलेगा। भारत विश्व का ऐसा चौथा देश होगा। पिछली सरकार में चार करोड़ करदाता थे, अब करीब दोगुने हो गए।
इधर लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विकास और सामाजिक समरसता का सन्देश दिया। डेढ़ वर्ष में उनकी सरकार ने अनेक क्षेत्रों में रिकार्ड कार्य किये है। इन्वेस्टर्स समिट, इसमें रिकार्ड निवेश प्रस्ताव, इसके बाद रिकार्ड प्रस्ताव का शिलान्यास, एक जिला एक उत्पाद, रक्षा गलियारे के रिकार्ड कदम, खाद्यान्न की रिकार्ड खरीद आदि उपलब्धियां है। योगी आदित्यनाथ इसके बल पर जाति मजहब की राजनीति का जबाब देना चाहते है।







