Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Monday, June 15
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग

    आदर्श राजनीति-शास्त्री थे अटल जी

    By August 16, 2018 ब्लॉग No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 493
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    राजनीति और राजनीति शास्त्र दोनों अलग क्षेत्र है। राजनीति में सक्रियता या आचरण का बोध होता है, राजनीति शास्त्र में ज्ञान की जिज्ञाषा होती है। अटल बिहारी वाजपेयी ने इन दोनों क्षेत्रों में समान रूप से आदर्श का पालन किया। राजनीति में आने से पहले वह राजनीति शास्त्र के विद्यार्थी थे। कानपुर के डीएवी कॉलेज में नई पीढ़ी भी उनके यादों का अनुभव करती है। अटल जी उन नेताओं में शुमार थे, जिनके कारण किसी पद की गरिमा बढ़ती है। डीएवी में जाने पर अनुभूति होती है कि यहीं कभी अटल जी विद्यार्थी के रूप में उपस्थित रहते थे। कालेज के प्रथम तल पर कमरा नम्बर इक्कीस में वह बेंच पर बैठते थे।
    डीएवी कानपुर में अटल जी के गुरु रहे प्रो मदन मोहन पांडेय के निर्देशन में मुझे पीएचडी करने का सौभाग्य
    मिला। अक्सर बातचीत में वह अटल जी की चर्चा करते थे। इससे यह पता चला कि अटल जी बहुत होनहार विद्यार्थी थे, उनमें ज्ञान के प्रति जिज्ञाषा थी।
    प्रो पांडेय के निर्देशन में पीएचडी करने के बाद शिक्षक के रूप में मेरी नियुक्ति इसी विभाग में हुई। यहां प्रवेश करते ही अटल जी की फोटो दिखाई देती है। नीचे पूर्व प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि पूर्व छात्र लिखा है। यहां बैठने पर ऊपर एक सूची पट्ट दिखाई देता है। उन्नीस सौ सैंतालीस पर नजर टिक जाती है। इसमें विद्यार्थी का नाम लिखा है -अटल बिहारी वाजपेयी–डिवीजन प्रथम, पोजिशन द्वितीय। यह वह समय था जब कानपुर विश्वविद्यालय अस्तित्व में नहीं था। डीएवी आगरा विश्वविद्यालय से संबन्ध था। इतने बड़े विश्वविद्यालय में अटल जी ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी।
    अटल जी ने राजनीति शास्त्र में एमए करने के बाद यहीं अगले वर्ष एलएलबी में दाखिला लिया था। सरकारी नौकरी से अवकाश ग्रहण करने के बाद उनके  पिता पंडित कृष्ण बिहारी  लाल वाजपेयी ने भी विधि स्नातक  करने  का निर्णय किया था। डीएवी  छात्रावास में पिता पुत्र एक ही कमरे में रहते थे। कभी पिताजी देर होती तो अटल से पूंछा जाता कि आपके पिताजी कहां है। जब अटल जी को देर हो जाती तो पिताजी से पूछा जाता आपके साहबजादे कहां हैं। लेकिन हंसी मजाक का यह दौर ज्यादा नहीं चला। एक वर्ष बाद ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से मिले दायित्व को संभालने के लिए अटल जी लखनऊ आ गए। विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी।
    अटल जी राजनीति शास्त्र में डिग्री हासिल करना चाहते थे। लेकिन उनके पिता आर्थिक रूप से खर्च वहन करने में असमर्थ थे। तत्कालीन राजा जीवाजी राव सिंधिया को हुई तो उन्होंने वाजपेयी जी को छात्रवृत्ति देने की व्यवस्था की। छात्रवृत्ति लेकर कानपुर आए और डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में परास्नातक किया। इस दौरान अटल जी को हर माह पच्छत्तर रुपए मिलते रहे।
    डीएवी में प्रो मदन मोहन पांडेय नियमित क्लास लेते थे। अटल भी छुट्टी नहीं लेते थे। लेकिन इतने मात्र से उनकी जिज्ञाषा शांत नहीं होती थी। वह साइकिल से प्रो पांडेय के पी रोड स्थित आवास पर पहुंच जाते थे। प्रो पांडेय ने मुझे काला सन्दूक दिखाया था। अटल जी उसी पर आकर बैठ जाते थे, कभी बाहर चबूतरे पर बैठ जाते थे। अक्सर प्रो पांडेय घर मे नहीं होते थे , तब वह माता जी से बात करते रहते थे। प्रो पांडेय के घर पर एक टी सेट आज भी सुरक्षित रखा है। इसे अटल लेकर आये थे। स्व शारदा पांडेय की पुत्रवधू डॉ शक्ति पांडेय ने बताया था कि माता जी ने इन कप प्लेटों को शीशे की एक अलमारी में बंद करा दिया था। ये बाहर से दिखाई तो देते थे, लेकिन इसमें चाय पीने की इजाजत किसी को नहीं थी। माता जी कहती थीं कि चाय के लिए निकाले तो टूट जायेगे। इसे अटल पैसे जोड़ कर लाये थे।
    प्रो पांडेय जब वृद्धावस्था के कारण गंभीर रूप से अस्वस्थ थे, तब मैं उनके पी रोड आवास पर मौजूद था। उनका जब निधन हुआ उस समय अटल जी प्रधानमंत्री थे। उस समय मोबाइल फोन नहीं थे। एक घण्टे बाद बेसिक फोन पर घण्टी बजी, उधर से बताया गया कि प्रधानमंत्री जी प्रो पांडेय के पुत्र से बात करना चाहते है। पुत्र डॉ कौशल किशोर पांडेय ने फोन पर बात की। अटल जी ने संवेदना व्यक्त की। कुछ पुरानी बात का उल्लेख किया। कहा कि गुरु जी ने जो पढ़ाया, उसी रास्ते पर चला हूं। कुछ देर बाद जिला प्रशासन के अधिकारी प्रधानमंत्री की ओर से पुष्पांजलि देने आ गए थे।
    अटल जी कर्मयोगी थे। विद्यार्थी थे ,तब ज्ञान प्राप्त करने में पूरी ऊर्जा लगा दी। पत्रकारिता में गए तो, उसे भी पूरी क्षमता से अंजाम दिया। राजनीति में गए तो उच्च मर्यादाओं की स्थापना कर दी। वह भारतीय राजनीति के अजातशत्रु थे। उन्होंने उस दौर में राजनीति शुरू की थी, जब जनसंघ सत्ता की लड़ाई से बहुत दूर थी। माना जाता था कि यह पार्टी विपक्ष में रहने के लिए बनी है। इसके बाबजूद अटल जी जब बोलते थे, तब प्रधानमंत्री सहित जनसंघ के विरोधी भी ध्यान से सुनते थे। सँख्याबल कमजोर था, लेकिन विचार मजबूत थे। शायद यही कारण था कि जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री बताया था।
    सात दशक के राजनीतिक जीवन में उनका दामन बेदाग रहा। सत्ता मिली तब भी सहज रहे। सत्ता उद्देश्य नहीं बल्कि दायित्व था। विपक्ष में ही सत्तर वर्ष रहे, राष्ट्र के लिए वैसा ही समर्पण रहा।  तत्कालीन  प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव ने उन्हें भारत का पक्ष रखने के लिए जेनेवा भेजा था। अटल जी अपने इस दायित्व को बखूबी निभाया। वह अपने लिए नहीं देश और समाज के लिए जिये। उनका जीवन प्रेरणादायक है। उनके निधन से देश की अपूरणीय क्षति हुई है। संवेदना।

    Keep Reading

    A weeping Great Nicobar and a smiling 'Ego'!

    रोता हुआ ग्रेट निकोबार और मुस्कुराता हुआ अहम्!

    US attack off the Oman coast and diplomatic surrender: Is India's strategic autonomy merely a facade?

    ओमान तट पर अमेरिकी हमला और कूटनीतिक आत्मसमर्पण: क्या भारत की रणनीतिक स्वायत्तता एक छलावा मात्र है?

    Many writers are caught in a labyrinth of duties!

    कर्त्तव्यों के चक्रव्यूह में घिरे हैं कई कलमकार!

    Do not play vote-bank politics at the cost of internal security.

    आंतरिक सुरक्षा की कीमत पर वोटों की राजनीति न करें

    Sold taxi to save a girl's life; later, the true recipient of the gold medal was found.

    टैक्सी बेचकर बचाई लड़की की जान, फिर मिला गोल्ड मेडल का असली हकदार

    When a clever merchant and an innocent king taught a lesson to the forest and the sea...!

    जब चतुर व्यापारी और मासूम राजा ने दी जंगल और समंदर को सीख तब..!

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    A weeping Great Nicobar and a smiling 'Ego'!

    रोता हुआ ग्रेट निकोबार और मुस्कुराता हुआ अहम्!

    June 14, 2026
    US attack off the Oman coast and diplomatic surrender: Is India's strategic autonomy merely a facade?

    ओमान तट पर अमेरिकी हमला और कूटनीतिक आत्मसमर्पण: क्या भारत की रणनीतिक स्वायत्तता एक छलावा मात्र है?

    June 14, 2026
    Lethal danger at the railway crossing! Scouts raise awareness through street plays.

    रेलवे क्रॉसिंग पर मौत का खतरा! स्काउट्स ने नुक्कड़ नाटक से जगाई सावधानी

    June 14, 2026
    Body of a 12-year-old boy found on a cot with a belt tightened around his neck.

    चारपाई पर पड़ी मिली 12 वर्ष के बच्चे की गले में बेल्ट से कसी हुई लाश

    June 13, 2026

    3 मिनट की झपकी एक ईमानदार इंसान की इज़्ज़त लगभग छीन लेती

    June 13, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading