करोड़ों हिंदुस्तानियों को यह दुखद सूचना नि:शब्द कर गई कि अटल जी नहीं रहे वह भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष एवं हर दिल अजीज राजनेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई अब सिर्फ स्मृति शेष है। लंबी बीमारी के पश्चात उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में अंतिम सांस ली।
कहा जा सकता है कि उनके निधन के साथ ही भारतीय राजनीति के एक स्मरणीय युग का अवसान हुआ है। अटलजी अविवाहित थे हालांकि उनकी एक दत्तक पुत्री नमिता और दामाद रंजन भट्टाचार्य उनके साथ रहते थे। खराब स्वास्थ्य और याददाश्त कमजोर होने के बाद से वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नहीं थे। उनके निधन के समाचार चलते ही सारा देश शोक की लहर में डूबा गया था। एक दिन की सरकारी छुट्टी और सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित हो गया।
साधारण जीवन बिताने के बावजूद उनका व्यक्तित्व आसाधारण था वह समाज के हर वर्ग के राजनेता रहे। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे और बाद में उन्होंने अप्रैल 1980 में भाजपा की स्थापना की।
वह अपने प्रतिद्वंदियों में भी लोकप्रिय रहे, वर्ष 1994 में लोकसभा में 2 सदस्यों से बढ़कर भाजपा 1996 में पहली बार केंद्र की सत्ता तक लाने और फिर 1998 में बहुमत की सरकार चलाने का श्रेय भी श्री अटल बिहारी वाजपेई को ही जाता है। 16 मई से 28 मई 1996 तक 13 दिनों तक तथा फिर 19 मार्च 1998 में 22 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे।
वह ऐसे पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री हुए, जिन्होंने 5 साल तक बिना किसी विवाद या समस्या के सत्ता संचालित की। उनका कभी किसी दल से दुराव नहीं रहा। विपक्षी तो यहां तक कहते थे कि उनकी पार्टी ठीक नहीं है लेकिन उनके नेतृत्व और व्यक्तित्व में कोई कमी नहीं है। वह एक सफल पत्रकार कवि एवं प्रखर चिंतक रहें, प्रशंसा की बात हो तो अपने राजनीतिक विरोधियों के भी सफल प्रयास दिल खोलकर प्रशंसा करते थे। पाकिस्तान में हुए युद्ध में जब 1971 में भारत में ऐतिहासिक जीत दर्ज की अटल जी ने तो इंदिरा गांधी ने दुर्गा का अवतार कहकर उनके प्रति सम्मान प्रकट करने में जरा भी हिचक नहीं दिखाई। भारतीय राजनीति में निर्विवाद राजनेता के रूप में हमेशा याद किए जाते रहेंगे। सांप्रदायिक सौहार्द के प्रति हर दिल अजीज नेता अटल जी आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी स्मृतिया हमारे दिलों में हमेशा ज़िंदा रहेंगी। ऐसी महँ विभूति को शत-शत नमन, प्रणाम।
- जी क़े चक्रवर्ती







