- लम्बे समय से दलित शिक्षकों व बीएसए कार्यालय के टकराव पर फिलहाल लगा विराम संघर्ष समिति का बड़ा आरोप आज रविवार को बीएसए कार्यालय खोलकर आरक्षण विरोधी करा रहे थे साजिश आरक्षण समर्थक भड़के
- संघर्ष समिति ने पूरे मामले पर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की उठायी मांग कहा अब उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी हुआ अन्याय तो नहीं बैठेंगे चुप
- फैसला आते ही लखनऊ के दलित शिक्षकों ने ली राहत की सांस
लखनऊ, 19 अगस्त 2018: लखनऊ के सैकड़ों दलित शिक्षकों के वेतन फ्रीज व रिवर्शन को लेकर जहां जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ के कार्यालय में लम्बे समय से तनातनी जारी है। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति द्वारा धरना प्रदर्शन करने के बावजूद भी जहां बेसिक शिक्षा अधिकारी लखनऊ कार्यालय दलित शिक्षकों के रिवर्शन व वेतन फ्रीज करने पर अमादा है, वहीं सरकार द्वारा भी इस मामले पर चुप्पी साधे रहने पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र के सदस्यों जो दलित शिक्षक लखनऊ में कार्यरत हैं, उनके द्वारा मा. उच्च न्यायालय लखनऊ खण्ड पीठ में पूर्व में दाखिल याचिका सं0-2104/2018 के साथ एक अन्य याचिका सं0-23534/2018 सर्विस सिंगल 14 अगस्त को दाखिल कर रिवर्शन व वेतन फ्रीज की कार्यवाही को चुनौती दी गयी थी।
जिसमें कल शनिवार को सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय लखनऊ खण्ड पीठ के मा. जस्टिस श्री इरशाद अली द्वारा अन्तरिम फैसला सुनाते हुए इस पूरे मामले पर यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश जारी किया गया। फैसला आते लखनऊ के दलित शिक्षकों ने फिलहाल राहत की सांस ली है। संघर्ष समिति संयोजकों ने आज एक आवश्यक बैठक कर पूरे मामले पर विचार विमर्श किया।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. रामशब्द जैसवारा आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, पीएम प्रभाकर, अन्जनी कुमार, अशोक सोनकर, प्रेमचन्द्र, श्री निवास राव, जितेन्द्र कुमार, राजेश पासवान, अरविन्द कुमार, प्रभू शंकर, अरविन्द फरसोवाल, रामेन्द्र कुमार, सुनील कनौजिया ने कहा कि जहां एक तरफ उच्च न्यायालय के फैसले की प्रति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेज दी गयी है। वहीं दूसरी ओर आज रविवार को बीएसए कार्यालय खोलकर आरक्षण विरोधियों के दबाव में दलित शिक्षकों के खिलाफ साजिश की रणनीति बनती रही, जिस पर सघर्ष समिति ने यह चेतावनी दी है कि यदि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद भी दलित शिक्षकों का अहित हुआ तो यह पूरा मामला उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना की श्रेणी में आयेगा।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से यह मांग की है कि जिस प्रकार से बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ कार्यालय द्वारा दलित शिक्षकों के साथ अन्याय किया जा रहा है, उस पर तुरन्त विराम लगवाया जाये। यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि एक तरफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के क्रम में भारत सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण दिये जाने का आदेश जारी किया जाता है और वहीं दूसरी ओर लखनऊ में लगातार दलित शिक्षकों को रिवर्ट कराने की साजिश की जा रही है।






