सुविधाओं का अभाव
फिर भी गांव से लौटना
करता है उदास।
चिड़ियों के कलरव का भोर
मवेशियों की हलचल
बछड़े की पुकार
आंगन बुहारने का संगीत
बिना कहे शुभप्रभात
सुविधाओं का अभाव–
खेत खलिहान
जमीन पर उतरते है जामुन आम
मकई का स्वाद
पानी में मुस्कुराते हैं नन्हें धान
सब करते है मन की बात
लेकिन इन्हें छोड़ कर आ जाते है
हम विवश-लाचार।
सुविधाओं का अभाव—
फिर वही कंक्रीट के जंगल
न गौरैया न वैसा बिहान
कहते है गुड़ मॉर्निंग
लेकिन अनुभूति का अभाव।
बनावट और कृतिम मुस्कुराहट
वाहनों का शोर और भागम भाग
इसके बाद भी अतृप्त
असंतोष का भाव।
सुविधाओं का अभाव–
– डॉ दिलीप अग्निहोत्री







