- कारपोरेशन के गोलमोल आंकडों पर आयोग ने फैसला किया सुरक्षित
- उत्पादन लागत में कमी के आधार पर उपभोक्ताओं की बिजली दरों में कमी के लिये उपभोक्ता परिषद की याचिका पर आज आयोग में दूसरी बार हुयी सुनवाई
लखनऊ, 11 सितम्बर 2018: राज्य विद्युत उत्पादन निगम की उत्पादन लागत में 54 पैसे प्रति यूनिट की कमी के चलते लगभग 1700 करोड़ रू. के फायदे का लाभ उप्र की जनता की दिलाने हेतु उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा दाखिल याचिका पर सूओ मोटो कार्यवाही के तहत आज उप्र विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष आरपी सिंह व सदस्य एसके अग्रवाल व सदस्य श्री केके शर्मा की उपस्थित में प्रातः 11.30 बजे सुनवाई सम्पन्न हुई, जिसमें पावर कारपोरेशन की ओर से मुख्य अभियन्ता आएयू द्वारा वर्ष 2016-17 वर्ष 2017-18 व वर्ष 2018-19 के माह अप्रैल, मई, जून के विभिन्न उत्पादन गृहों से खरीद की गयी बिजली की खरीद दर को सौंपा गया।
जिसको आयोग ने संज्ञान में लेते हुये उपभोक्ता परिषद को अपनी बात रखने का अवसर दिया। आयोग ने उपभोक्ता परिषद को कारपोरेशन द्वारा प्रस्तुत डाटा पर अपना जवाब फाइल करने का दिया आदेश जिस पर उपभोक्ता परिषद ने मात्र 30 मिनट के अन्दर ही साक्ष्यों सहित कर दिया जवाब फाइल। फिलहाल आयोग ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया है।
प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से अपनी बात रखते हुये राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आयोग द्वारा इस याचिका में जो अंतरिम आदेश दिया गया था उसके आधार पर पावर कारपोरेशन को सभी उत्पादन गृहों से अलग अलग खरीदी गयी, वास्तविक विद्युत खरीद का विवरण देना था जो उनके द्वारा नही दिया गया। कारपोरेशन द्वारा आज सौंपे गये डाटा में किसी भी उत्पादन कम्पनी की अलग अलग न तो फिक्सड कास्ट दर्शायी गयी है और न ही वैरेबिल कास्ट दर्शायी गयी है केवल बिजली खरीद की दर दर्शाकर मनगढन्त जवाब दिया गया है।
उदाहरण के तौर पर उपभोक्ता परिषद आयोग के सामने जो आंकडे पेश कर रहा है उससे पावर कारपोरेशन की पोल खुल जायेगी। पावर कारपोरेशन द्वारा वर्ष 2018-19 में मई 2018 में अनपरा ए से बिजली खरीद की दर रूपया 2.61 प्रति यूनिट बताया गया है जबकि एसएलडीसी की साइट पर वास्तविक डाटा घोषित किया गया है उसमें अनपरा ए से मई 2018 में रूपया 2.49 प्रति यूनिट में बिजली खरीद बतायी गयी है। इसी प्रकार पावर कारपोरेशन ने अनपरा बी से मई 2018 में रूपया 2.13 प्रति यूनिट में बिजली खरीद बतायी गयी है वहीं एसएलडीसी द्वारा सत्यापित घोषित खरीद दर रूपया 1.89 प्रति यूनिट है। इसी प्रकार ओबरा बी से पावर कारपोरेशन ने बिजली खरीद की दर मई 2018 में रूपया 2.53 प्रति यूनिट बतायी गयी है जबकि एसएलडीसी द्वारा सत्यापित घोषित खरीद दर मई 2018 में ओबरा बी की रूपया 2.46 प्रति यूनिट है। इसी प्रकार अन्य उत्पादन ग्रहों की दरों की भी खरीद दर को बढा कर बताया गया है। जो अपने आप मेें चौकाने वाला है।
उपभोक्ता परिषद ने वर्ष 2016-17 की बिजली खरीद पर पावर कारपोरेशन द्वारा दिये गये उत्पादन गृहवार दरों पर चर्चा करते हुए उदाहरण के तौर पर कहा कि कारपोरेशन ने बजाज से रूपया 7.30 प्रति यूनिट में बिजली खरीद की बात कही गयी है लेकिन उसका कोई भी ब्रेकअप नही बताया गया है कि फिक्सड कास्ट क्या थी और वैरेबिल कास्ट क्या थी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग के सामने यह भी रखा कि जब प्रदेश के ऊर्जा मंत्री जी द्वारा विधान सभा में यह बयान दिया जा चुका है कि वर्ष 2016-17 की अपेक्षा वर्ष 2017-18 में उत्पादन की कास्ट में 31 पैसा प्रति यूनिट की कमी आयी है। फिर पावर कारपोरेशन इसका विस्तृत डिटेल क्यों नही देता है। पावर कारपोरेशन पूरे मामले को उलझाकर समय बर्बाद कर रहा है। जिससे जनता को लाभ न मिल पायें। ऐसे में आयोग को पूरे मामले पर उचित निर्णय लेना चाहिये।







