- सीटों की भीख नहीं चाहिए: मायावती
- दलित, अल्पसंख्यक व सवर्ण समाज के गरीबों के सम्मान से समझौता नहीं करेंगे
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2018: महागठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर बसपा प्रमुख मायावती ने विराम लगाते हुए कहा कि सीटों की भीख मांगने से अच्छा है कि पार्टी अपने बूते पर अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि दलित, अल्पसंख्यक व सवर्ण समाज के गरीबों के सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा।
बता दें कि बसपा प्रमुख ने मंगलवार को पार्टी के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि दलित, अल्पसंख्यक व सवर्ण समाज के गरीबों की बदहाली के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों जिम्मेदार है।
गरीबों के स्वाभिमान से समझौता नहीं:
उन्होंने कहा कि मप्र व छतीसगढ़ में कांग्रेस के साथ गठबंधन सम्मानजनक सीटे न मिलने के कारण नहीं हो सका है। भाजपा व कांग्रेस गरीबों की हितैषी होती तो इन वगरें की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक व शैक्षणिक हालत आज इतनी ज्यादा बदतर नहीं होती। भाजपा सरकारें दलितों पर जुल्म करने वालों का साथ दे रही है, जिससे मुक्ति पाना जरूरी है। गरीबों के सम्मान व स्वाभिमान के साथ कभी समझौता नहीं किया जा सकता, इसके लिए कांग्रेस व भाजपा सरकारों की कितनी ही विद्वेष एवं प्रताड़ना क्यों न झेलनी पड़े।
उत्तर भारतीयों को निशाना बनाना दुर्भाग्यपूर्ण:
बसपा प्रमुख मायावती ने गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हो रहे हमलों की निन्दा करते हुए कहा कि यह देश के लिए बड़ी चिन्ता की बात है, जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए। गैर गुजराती मेहनतकश लोगों पर इस प्रकार की जुल्म ज्यादती, हिंसा, तनाव तथा अराजकता का जो नया माहौल पैदा हो गया है, वह गलत है, उन पर हमला करने वालों को कानूनी सजा मिलनी ही चाहिए। इसकी आड़ में उप्र व बिहार में गरीब गरीब, मजदूर व कामगारों परिवारों को हिंसा का शिकार बनाना सर्वथा अनुचित है। इस प्रकार के भेदभाव से क्षेत्रवाद को बढ़ावा मिलता है जिससे देश कमजोर होता है।







